खरीदारों का पैसा नहीं देने पर अंसल हाईटेक टाउनशिप का निदेशक गिरफ्तार
- जिला प्रशासन ने की कार्रवाई, बिल्डर पर 119 आरसी का है 23.70 करोड़ रुपये है बकाया
- यूपी रेरा ने आदेशों का पालन नहीं करने पर जारी की गई थी आरसी, संपत्ति कुर्क करने की तैयारी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) के रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) का बकाया नहीं देने पर अंसल हाईटेक टाउनशिप के निदेशक दिनेश प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 24 घंटे तक हवालात में रखने के बाद बिल्डर ने पैसा जमा नहीं कराया। जिसके बाद सदर तहसील की टीम ने निदेशक को जेल भेज दिया। बिल्डर पर आरसी का 23.70 करोड़ रुपये बकाया है। अब बिल्डर की संपत्तियों को कुर्क करने की तैयारी की जा रही है। यूपी रेरा ने फ्लैट खरीदारों का पैसा लौटाने के लिए आरसी जारी की थी।
उपजिलाधिकारी सदर अंकित कुमार ने बताया कि अंसल हाइटेक टाउनशिप के खिलाफ यूपी रेरा की 119 आरसी लंबित हैं। आरसी का पैसा जमा करने के लिए बिल्डर को कई बार नोटिस जारी किए गए। बिल्डर के प्रोजेक्ट पर मुनादी कराई गई थी, लेकिन पैसा जमा नहीं कराया गया। बार-बार चेतावनी व नोटिस के बाद बिल्डर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। बृहस्पतिवार की शाम अंसल हाईटेक टाउनशिप के निदेशक दिनेश प्रताप सिंह को नोएडा से गिरफ्तार किया गया। दादरी तहसील की हवालात में निदेशक को बंद कर रखा गया। शुक्रवार की शाम तक पैसा जमा नहीं करने पर दिनेश प्रताप को जिला जेल भेज दिया गया। अब बिल्डर की अचल संपत्ति को कुर्क करने की कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट की सख्ती आ रही है खरीदारों के काम
यूपी रेरा से आरसी जारी होने के साथ ही खरीदार हाईकोर्ट का रुख कर रहे हैं। हाईकोर्ट वसूली करने का आदेश जारी कर रहा है। वसूली नहीं होने पर आदेश की अवमानना का नोटिस प्रशासन को जारी किए जा रहे हैं। जिसके डर से लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस समय सैकड़ों की संख्या में हाईकोर्ट के आदेश प्रशासन स्तर पर लंबित हैं।
एनसीएलटी से बाहर होने पर शुरू की कार्रवाई
तहसील के अफसरों ने बताया कि एनसीएलटी में अंसल हाईटेक टाउनशिप को दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई शुरू हुई थी। इस आदेश से केवल गुरुग्राम का एक प्रोजेक्ट प्रभावित है। बिल्डर के बाकी प्रोजेक्ट प्रभावित नहीं हैं। इस संबंध में एनसीएलटी ने एक आदेश भी जारी किया है। उसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। साथ ही यूपी रेरा ने भी सुनवाई शुरू कर दी है।
बड़े बकाएदारों पर होगी कड़ी कार्रवाई
तहसील सदर की टीम एक साल में बिभिन्न बिल्डरों से करीब 35 करोड़ रुपये वसूल चुकी है। अब टीम ने बड़े बकाएदारों के खिलाफ अभियान शुरू किया है। इनमें अंसल की तीन कंपनियां है। जबकि अन्य में सिक्का, ग्रीनवे और वर्धमान समेत अन्य अन्य बड़े बकाएदारों में शामिल हैं। जिला प्रशासन की टीम इससे पहले भी बिल्डरों पर कार्रवाई करती रही है। बीते साल दादरी तहसील की टीम ने सनवर्ल्ड कंपनी के निदेशक को हिरासत में लिया गया था। करीब 10 घंटे हिरासत में रखने के बाद बिल्डर ने पैसा जमा करा दिया था। जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया। हाल ही में टीम वेव मेगा सिटी सेंटर के बिल्डर को गिरफ्तार करने पहुंची थी। गिरफ्तारी के डर के कारण बिल्डर ने 11 करोड़ रुपये जमा करा दिए थे।
8375 आरसी जारी कर चुका है यूपी रेरा
यूपी रेरा अभी तक विभिन्न बिल्डरों के खिलाफ 8385 आरसी जारी कर चुका है। जो 4000 करोड़ रुपये से अधिक की है। इनमें से 2575 आरसी का निस्तारण हो चुका है और इन खरीदारों के पास 410 करोड़ पहुंच चुका है, लेकिन बाकी 5000 से अधिक खरीदार अभी भी अपना पैसा मिलने का इंतजार कर रहे है।
गौतमबुद्ध नगर की है सबसे अधिक आरसी
यूपी रेरा की सबसे अधिक आरसी गौतमबुद्ध नगर की है। जिला प्रशासन करीब 600 करोड़ की आरसी वापस कर चुका है। जबकि 300 करोड़ की वसूली कर चुका है। उसके बाद भी इस समय 300 करोड़ से अधिक की आरसी बकाया है। प्रशासन ने बिल्डरों की कुर्क संपत्ति की ई-नीलामी करने का भी प्रयास किया गया था। जो असफल रहा। जिसके बाद अब दूसरा रास्ता अपनाया है।
अंसल हाईटेक टाउनशिप पर यूपी रेरा की आरसी का 23 करोड़ से अधिक बकाया है। पैसा नहीं देने पर बिल्डर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। बकाया नहीं देने वाले अन्य बिल्डरों को गिरफ्तार कर जेल भेज जाएगा। -
अंकित कुमार, एसडीएम सदर
आरोसी रिकॉर्ड के आधार पर हुई कार्रवाई
एसडीएम सदर ने बताया कि दिनेश प्रताप सिंह फिलहाल मिगसन ग्रुप में कार्य करते हैं। हालांकि रिकॉर्ड ऑफ कंपनी (आरओसी) की वेबसाइट पर वो अंसल हाईटेक टाउनशिप के निदेशक हैं। उसी के आधार पर कार्रवाई की गई है। वहीं, मिगसन ग्रुप के पदाधिकारियों ने प्रशासन की इस कार्रवाई से किसी भी तरह का संबंध होने से इन्कार किया है।