यमुना सिटी (संवाद)। द्वारिकाधीश भगवान श्रीकृष्ण को जब पता चला कि उनसे मिलने सुदामा आए हैं तो वह नंगे पैर ही दौड़ पड़े। वह भागते हुए अपने महल के दरवाजे पर पहुंचे और हताश होकर लौट रहे अपने मित्र को महल में लेकर आए। सुदामा के छाले देखकर भगवान रो पड़े और आंसुओं से उनके पैर धुलाए। श्रीकृष्ण और सुदामा की इस मित्रता को देखकर लोगों की आंखें नम हो गईं। ये सभी दृश्य रबूपुरा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान झांकी में देखने को मिले। सुबह आठ बजे हवन-पूजन के साथ कथा का शुभारंभ किया गया। इसके बाद कालयवन वध, ऊशा माता मंदिर राजस्थान का विवर्ण, सुदामा चरित्र समेत अन्य कई धार्मिक कथाओं का पाठ किया। शाम को आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।