पीरिएड्स लीव की मांग महिलाओं के रोजगार पर बढ़ाएगी संकट
- पीरियड्स लीव ने शुरू की नई बहस, पिछले 10 सालों में बढ़ा महिलाओं को रोजगार देने का अनुपात
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-62 की एक आईटी कंपनी की बतौर एचआर काम करने वाली अनन्या पांडेय के पास हर महीने पीरियड्स की वजह से दो से तीन छुट्टी के मेल आ रहे हैं। इस पर उनको हर किसी को पीरियड्स लीव पॉलिसी में नहीं है, इसका मेल जारी करना पड़ रहा है। लेकिन पिछले महीने पीरियड्स की छुट्टी के लिए पांच मेल आने पर उनको सभी कर्मचारियों को कॉमन सर्कुलर मेल जारी करके लीव पॉलिसी की स्थिति को साफ करना पड़ा है। यह सिर्फ एक कंपनी का हाल नहीं है। सेक्टर- 15 में एक कंपनी की एचआर पारुल मुखर्जी भी कुछ ऐसा ही बताती हैं।
लेकिन अब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का पीरियड्स लीव को महिलाओं के लिए गैर जरूरी बताना नई बहस को जन्म दे दिया है। शहर में तमाम महिलाएं उनकी इस राय से सहमत नहीं हैं। इनका मानना है कि महिलाओं के प्रति समाज को सहानुभूति पूर्ण रवैया अपनाते हुए इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए। हालांकि कुछ महिलाएं इससे इतर राय भी रखती हैं।
मैं बिना दवाई के नहीं रह सकती
पीरियड्स का दर्द हर महिला के लिए अलग होता है। इस दौरान मेरे लिए तो बिना दवाई के रहना मुश्किल है। स्कूल में भी इस दौरान मैं हमेशा छुट्टी पर रहती थी। लेकिन ऑफिस से छुट्टी मिलना संभव नहीं है। कई बार तो कमजोरी की वजह से खड़ा रहना तक मुश्किल हो जाता है। हमेशा डर रहता है कहीं कपड़े नहीं खराब हो जाएं। इसके कारण काम में ध्यान भी नहीं लग पाता।
समृद्धि रतन, सेक्टर- 62
-
हालात के अनुसार मिले छुट्टी
सामान्य तौर पर एक लड़की को पीरियड्स 13 से 14 साल में शुरू हो जाते हैं। नौकरी में आते हैं तो अधिकांश की उम्र 20 से ज्यादा ही रहती है। ऐसे में उसकी आदत हो चुकी होती है। यह भी सच है कि सभी को छुट्टी की जरूरत नहीं होती है। लेकिन कुछ महिलाओं को इस दौरान बहुत दिक्कत होती है। इसलिए छुट्टी भी हालात को देखकर मिलनी चाहिए।
शिखा मेहरा, सेक्टर-16 ए
हर लड़की जानती है कितना दर्द होता
पीरियड्स के दौरान साफ सफाई का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। थोड़ी-थोड़ी देर में वॉशरूम जाना पड़ता है। बर्ताव में भी हर पल बदलाव होते हैं। इसलिए हमेशा छुट्टी लेनी पड़ती है। इस वजह से सैलरी भी कट जाती है। इसकी जगह दूसरी छुट्टियां कम कर दी जाए, लेकिन पीरियड्स के शुरुआती दो दिनों की छुट्टी देनी चाहिए।
सिम्मी, सेक्टर-62
पीरिएड्स लीव से महिलाओं रोजगार देने में होगी हिचक
जिला उद्योग विभाग के अनुसार 50 हजार से ज्यादा उद्योग पंजीकृत हैं। इसमें सर्विस, ट्रेडिंग समेत सभी तरह के उद्योग शामिल हैं। हालांकि इसमें बड़ी कंपनियां करीब 250 हैं। वहीं, नोएडा एंप्लाइज एसोसिएशन (एनईए) के उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव कहते हैं कि जिले में 13 लाख से ज्यादा अधिकारी स्तर से लेकर वर्कर काम कर रहे हैं। इसमें करीब 30 प्रतिशत महिलाएं हैं, हालांकि कुछ कंपनी संचालक इस आंकड़े को और कम बता रहे हैं। उनका कहना है कि 10 साल पहले तक यह आंकड़ा 20 प्रतिशत तक था, लेकिन अब कंपनियों में महिलाओं का आंकड़ा बढ़ रहा है। महिला उद्यमी श्रेया शर्मा का कहना है, महिलाएं बहुत ईमानदारी और समय पर काम करती हैं। इससे उनके रोजगार पर असर पड़ सकता है। कोई कंपनी अपना नुकसान नहीं चाहेगी।
टॉकिंगहेड-
क्या कहतीं कामकाजी महिलाएं
आने वाली पीढ़ी को नहीं करना कमजोर
एक तरफ हम लैंगिक समानता की बात करते हैं और दूसरी तरफ मासिक धर्म लीव की। हम पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। वैसे भी यह कोई बीमारी नहीं है। इसलिए इसमें छुट्टी के पक्ष में नहीं हूं। पिछले लंबे सालों से हम इसके साथ जी रहे हैं। इससे आने वाली पीढ़ी कमजोर होगी।
मोनिका दीक्षित, प्रोफेसर
सिर्फ कष्ट झेल रही महिलाओं को मिले छुट्टी
कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दिक्कत होती है। ऐसी महिलाओं के लिए डॉक्टर के मेडिकल प्रिस्क्रिशन के आधार पर छुट्टी दी जा सकती है। इससे उनको कुछ राहत मिल जाएगी। अन्यथा यह एक सामान्य शारीरिक घटना है। इससे कंपनी को भी नुकसान नहीं होगा।
ज्योति त्रिपाठी, प्रोफेसर
अधिक दर्द तो इलाज की जरूरत
मासिक धर्म एक सामान्य शारीरिक घटना है। अध्ययनों से पता चला है, हल्के से मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम न केवल मासिक धर्म के दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं, बल्कि तनाव भी कम करते हैं। कुछ महिलाओं को मासिक धर्म में अधिक दर्द होता है। यह आमतौर पर विकृति है। इसके लिए जांच और इलाज की जरूरत होती है।
- डॉ शिवानी सचदेव गौड़, स्त्री रोग विशेषज्ञ