नई दिल्ली। एक अध्ययन के मुताबिक पिछले साल खतरनाक पीएम 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) के कारण दिल्ली में ही 54000 मौतें हुईं। वायु प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ के तय मानक से तकरीबन छह गुणा ज्यादा था। ग्रीनपीस दक्षिणपूर्व एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में प्रति दस लाख 1800 मौतें पीएम2.5 वायु प्रदूषण के कारण अनुमानित है। अध्ययन में पीएम 2.5 वायु प्रदूषण की वजह से 2020 में भारत की राष्ट्रीय राजधानी में तकरीबन 54000 मौतों का दावा किया गया है। भारत के अन्य शहरों में भी वायु प्रदूषण से मौतों की यही स्थिति रही। 2020 में मुंबई में 25000 मौतें होने का अनुमान है जबकि बंगल्रूरू, चेन्नई, हैदरबाद और लखनऊ में क्रमश: 12000, 11000, 11000 और 6700 मौतें हुईं। रिपोर्ट के अनुसार जीवाश्म इंधन के जलने से पैदा होने वाले सूक्ष्म पीएम 2.5 के प्रभाव का अध्ययन किया गया है। अध्ययन में गंभीर प्रदूषण के कारण पिछले साल दुनिया के पांच सबसे अधिक आबादी वाले शहरों दिल्ली, मैक्सिको सिटी, साउ पाउलो, शंघाई और टोक्यो में करीब 160000 लोगों की मौत समय से पहले होने का दावा किया गया है। जापान की राजधानी टोक्यो में खराब पीएम 2.5 वायू प्रदूषण के कारण 40000 मौतें हुईं।