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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर मामला : हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे किसान

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ग्रेटर नोएडा। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले की याचिका हाईकोर्ट में खारिज होने के बाद अब बोड़ाकी गांव के तीन किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है। किसानों ने याचिका दायर करते हुए कहा है कि इस परियोजना के लिए पहले ही जमीन अधिगृहीत की जा चुकी है। एक प्रोजेक्ट के लिए दो स्थान पर जमीन लेना न्यायसंगत नहीं है।
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किसान जयवीर, तेजपाल और संजय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। जिसके खिलाफ तीनों किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को याचिका दायर कर दी। याची जयवीर ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण के लिए वर्ष 2009 से वर्ष 2013 तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जिसमें किसानों को मुआवजे का भुगतान कर जमीन पर कब्जा लिया जा चुका है। उस जमीन पर प्रोजेक्ट तैयार करने के बजाय अब दूसरे स्थान पर जमीन लेने के लिए वर्ष 2019 से प्रयास शुरू किया गया। इस जमीन पर आबादी है। जिससे बोड़ाकी गांव के किसान परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए गांव के बाहर से पहले जमीन अधिगृहीत की जा चुकी है। आरोप लगाया गया है कि कुछ नेताओं, अधिकारी समेत पहुंच वाले लोगों को लाभ दिलाने के लिए प्रोजेक्ट का ले-आउट बदला गया है। किसानों का कहना है कि जब इस परियोजना के लिए पहले ही जमीन अधिगृहीत हो चुकी है तो दोबारा से जमीन लेना न्यायसंगत नहीं है। पहले किसानों के खेत अधिगृहीत कर लिए गए थे। अब उनकी आबादी जा रही है। किसानों ने बताया कि आगामी चार से पांच दिनों में धरना स्थल पर ही पंचायत करके आंदोलन की आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
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