लखनऊ। आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूरी 16 कलाओं से युक्त होता है और चांदनी अमृत से युक्त होती है। ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि पूर्णिमा की तिथि छह अक्तूबर को दिन में 12:23 से शुरू होकर सात अक्तूबर को सुबह 09:16 बजे तक रहेगी। सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण या श्री विष्णु जी या अपने इष्ट देव का पूजन अर्चना करना चाहिए और उपवास रखना चाहिए। रात में गाय के दूध की खीर बनाकर उसमें घी, चीनी मिलाकर अर्ध रात्रि को भगवान को भोेग लगाकर खीर को चांदनी रात में रखना चाहिए। वहीं, सनातन महासभा की ओर से सोमवार को शरद पूर्णिमा का पर्व झूलेलाल वाटिका में शाम छह बजे धूमधाम से मनाया जाएगा। सनातन महासभा के अध्यक्ष डाॅ. प्रवीण ने बताया कि 143वीं आदि गंगा मां गोमती की महाआरती होगी।