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वारदात पर जाने से पहले छूता था पिता के पैर, देता था बकरे या मुर्गे की बलि

Sun, 22 May 2016 04:01 PM IST
मनोज कुमार/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा

सार

  • काली मां की पूजा कर देता था बकरे या मुर्गे की बलि   
  • लूट और डकैती की रकम से 35 बीघा जमीन खरीदी
  • बावरिया गिरोह का सरगना रहा चुका चंदा का पिता 
  • एसटीएफ को मिली सफलता, बावरिया गिरोह का है मुखिया
  • 12 डकैती गौतमबुद्धनगर में और 10 राजस्थान में डाली 
  • ग्रेनो के पुबारी गांव का रहने वाला है 15 हजार का इनामी चंदा
  • डकैती के दौरान कई हत्या और जानलेवा हमले करने का आरोप
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गिरफ्तार
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विस्तार
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चंदा उर्फ करतार सिंह मीणा जब भी वारदात के लिए घर से निकलता तो सबसे पहले पिता मंगल के पैर छूकर आशीर्वाद लेता था और फिर काली मां की पूजा करता था। इसके बाद बकरे या मुर्गे की बलि देता था।
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पुलिस के मुताबिक, चंदा घर से निकलने से पहले पूजा-पाठ कर दुआ मांगता था, ताकि वह कहीं पकड़ा न जाए और जहां घटना करे माल अच्छा मिल जाए। चंदा का पिता मंगल भी बावरिया गिरोह हवा सिंह का सरगना रहा है।

उसने भी काफी घटनाएं की है इसलिए चंदा जब भी वारदात के लिए जाता तो पिता से गुर सीखकर जाता था। उसके पिता राजस्थान स्थित घर पर रहते थे। पिता की उसकी उम्र 100 साल पार हो चुकी है।
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एसटीएफ सीओ राजकुमार मिश्र ने बताया कि चंदा ने जब काफी रुपये कमा लिए तो वह बीकानेर के माधव गढ़ चला गया। उसने लूटपाट और डकैती की रकम से राजस्थान में 35 बीघा जमीन खरीदी। परिवार के साथ खेती बाड़ी करने लगा। उसने दवा देने का काम भी शुरू कर दिया।  

फेरीवाला बनकर करते थे रेकी
चंदा और उसके साथी जब भी किसी क्षेत्र में वारदात करने को निकलते तो सबसे पहले उस क्षेत्र में डेरा डालते थे। किराये पर ठेली लेकर सामान बेचकर रेकी करते थे। गांव के बाहरी छोर और अच्छा मकान देखकर ही घटना को अंजाम देते थे।

ज्यादातर बावरिया गिरोह ने खच्चर पर सामान बेचकर रेकी की। यह गिरोह गर्मी में सबसे अधिक वारदात करता था। गर्मियों में अक्सर लोग घर के बाहर सोते हैं, जिससे उन्हें काबू करना आसान होता था।

डाका डालने के लिए ट्रक से आते थे 
बावरिया गिरोह के कुछ बदमाश दिन में रेकी करते थे और रात में ट्रक से वारदात को अंजाम देने जाते थे। करीब एक किलोमीटर दूर ट्रक को खड़ा करते थे। घटनास्थल पर ही डकैती के सामान और नकदी का बंटवारा कर लेते थे, जिससे कोई भी कहीं भी जा सके। 

नंगला नैनसुख और रबूपुरा में डकैतियों की दी जानकारी
जारचा क्षेत्र के नंगला नैनसुख गांव में श्योराज के घर में डकैती डाली थी। इस घटना में गिरोह के कुछ सदस्यों को पकड़ा जा चुका है, लेकिन कुछ और सदस्यों के बारे में चंदा ने जानकारी दी है। एसटीएफ अफसरों की मानें, तो करतार ने रबूपुरा में हुई दो डकैतियों के बारे भी खुलासे किए हैं। पुलिस जांच कर रही  है। 
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22 डकैती डालने वाला 13 साल बाद गिरफ्तार   

गौतमबुद्धनगर और राजस्थान में 22 डकैती डालने वाला कुख्यात बावरिया चंदा सिंह उर्फ करतार सिंह मीणा 13 साल बाद एसटीएफ के हत्थे चढ़ गया। उस पर 15 हजार रुपये का इनाम था। एसटीएफ को उसके पास से एक बंदूक मिली। डकैती डालने के दौरान उस पर कई हत्या और जानलेवा हमले करने का आरोप भी है।

 एसटीएफ एसपी आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि बावरिया चंदा मूल रूप से ग्रेटर नोएडा के पुबारी का रहने वाला है। उसने 1994 में भाई लल्ला, गुलाब सिंह उर्फ गोपी और छब्बू के साथ मिलकर रबूपुरा में डकैती डाली थी। उसके चार साल बाद चंदा ने गैंग बनाया और कासना में परिवार को बंधक बनाकर डकैती डाली। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल से आने के बाद वर्ष 2000 में खेरली नहर के समीप ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार लोगों से लूटपाट की, लेकिन उस लूट में उसका नाम नहीं खुल सका था।

 वर्ष 2003 में कासना के एक दूध व्यापारी के घर डाका डाला था। परिवार के सदस्यों ने विरोध किया तो महिला की हत्या कर दी थी।  कासना पुलिस ने चंदा, गुलाब सिंह और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। उसी घटना में वर्ष 2000 में दूध व्यापारी से हुई लूट की घटना में उसका नाम खुल सका। उस समय डीआईजी ने चंदा पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस ने गुलाब सिंह को गिरफ्तार कर लिया था और बाकी आरोपी फरार थे। चंदा जिला छोड़कर राजस्थान के बीकानेर पहुंच गया। वहां उसने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर डकैती और लूटपाट की कई वारदात की।
 
इस तरह चढ़ा एसटीएफ के हत्थे 
चंदा पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को राजस्थान के बीकानेर स्थित घर ले गया, लेकिन कुछ साल पहले उसके पिता मंगल ने गांव जाने की इच्छा जताई तो उसे गांव में छोड़ गया। वह पिता से मिलने गांव आ रहा था और सिग्मा गोलचक्कर से उसे गिरफ्तार कर लिया। उसने पूछताछ में अब तक 22 से अधिक डकैती के मामले कबूल लिए, जबकि बाकी मामले उसके गैंग ने किए। 

राजस्थान में खरीदी जमीन, बैंक से लिया लोन 
बावरिया चंदा ने राजस्थान के नियाना गांव में जाकर अपना नाम करतार सिंह मीणा रख लिया था। हालांकि इससे पहले भी चरण, किशनपाल समेत कई नाम रख रखे थे। उसने राजस्थान में करतार सिंह मीणा बनकर वहां जमीन खरीदी और घर बनाया। इसके बाद फर्जी दस्तावेज के जरिये आईसीआईसीआई बैंक से सात लाख रुपये का लोन लिया। डेढ़ लाख रुपये का लोन और लेने की तैयारी में था। पहली बार मूंछ और दाढ़ी के साथ फोटो लगाकर लोन लिया था। इस बार जब आवेदन किया तो दाढी़ मूंछ कटवाकर फोटो चस्पा कराया था, जिससे उसकी पहचान न हो सके।  
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