चंदा उर्फ करतार सिंह मीणा जब भी वारदात के लिए घर से निकलता तो सबसे पहले पिता मंगल के पैर छूकर आशीर्वाद लेता था और फिर काली मां की पूजा करता था। इसके बाद बकरे या मुर्गे की बलि देता था।
पुलिस के मुताबिक, चंदा घर से निकलने से पहले पूजा-पाठ कर दुआ मांगता था, ताकि वह कहीं पकड़ा न जाए और जहां घटना करे माल अच्छा मिल जाए। चंदा का पिता मंगल भी बावरिया गिरोह हवा सिंह का सरगना रहा है।
उसने भी काफी घटनाएं की है इसलिए चंदा जब भी वारदात के लिए जाता तो पिता से गुर सीखकर जाता था। उसके पिता राजस्थान स्थित घर पर रहते थे। पिता की उसकी उम्र 100 साल पार हो चुकी है।
एसटीएफ सीओ राजकुमार मिश्र ने बताया कि चंदा ने जब काफी रुपये कमा लिए तो वह बीकानेर के माधव गढ़ चला गया। उसने लूटपाट और डकैती की रकम से राजस्थान में 35 बीघा जमीन खरीदी। परिवार के साथ खेती बाड़ी करने लगा। उसने दवा देने का काम भी शुरू कर दिया।
फेरीवाला बनकर करते थे रेकी
चंदा और उसके साथी जब भी किसी क्षेत्र में वारदात करने को निकलते तो सबसे पहले उस क्षेत्र में डेरा डालते थे। किराये पर ठेली लेकर सामान बेचकर रेकी करते थे। गांव के बाहरी छोर और अच्छा मकान देखकर ही घटना को अंजाम देते थे।
ज्यादातर बावरिया गिरोह ने खच्चर पर सामान बेचकर रेकी की। यह गिरोह गर्मी में सबसे अधिक वारदात करता था। गर्मियों में अक्सर लोग घर के बाहर सोते हैं, जिससे उन्हें काबू करना आसान होता था।
डाका डालने के लिए ट्रक से आते थे
बावरिया गिरोह के कुछ बदमाश दिन में रेकी करते थे और रात में ट्रक से वारदात को अंजाम देने जाते थे। करीब एक किलोमीटर दूर ट्रक को खड़ा करते थे। घटनास्थल पर ही डकैती के सामान और नकदी का बंटवारा कर लेते थे, जिससे कोई भी कहीं भी जा सके।
नंगला नैनसुख और रबूपुरा में डकैतियों की दी जानकारी
जारचा क्षेत्र के नंगला नैनसुख गांव में श्योराज के घर में डकैती डाली थी। इस घटना में गिरोह के कुछ सदस्यों को पकड़ा जा चुका है, लेकिन कुछ और सदस्यों के बारे में चंदा ने जानकारी दी है। एसटीएफ अफसरों की मानें, तो करतार ने रबूपुरा में हुई दो डकैतियों के बारे भी खुलासे किए हैं। पुलिस जांच कर रही है।