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पार किंग मा फिया पैदा कर कमाई अकूत संपत ्ित

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1500 से अधिक आरटीआई और शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच
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नोएडा। नोएडा प्राधिकरण में डीएसपी के तौर पर तैनात रहे हर्षवर्धन सिंह भदौरिया अवैध पार्किंग और अतिक्रमण को लेकर सवालों के घेरे में रहे। सपा सरकार के करीबी माने जाने वाले भदौरिया के खिलाफ 1500 से अधिक आरटीआई और शिकायतों दी गईं। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही इन शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ जांच शुरू हो गई थी।
एंटी करप्शन टीम के सूत्रों के मुताबिक, आरोप है कि भदौरिया की तैनाती के दौरान अवैध पार्किंग धंधा बड़े पैमाने पर पनपा था। शहर में जगह-जगह अपने खास लोगों के नाम पार्किंग के टेंडर आवंटित कराकर करोड़ों रुपये के वारे-न्यारे किए गए थे। इसकी वजह से प्राधिकरण को करोड़ों रुपये का नुकसान भी हुआ। जिन पार्किंग से प्राधिकरण को महज 40 से 50 हजार रुपये शुल्क मिलता था। अब नई पार्किंग नीति को लागू करने के बाद प्राधिकरण के खजाने में दो से ढाई करोड़ रुपये आने लगे हैं। नई पार्किंग नीति लागू होने के बाद भी पुरानी व्यवस्था चलाने वालों को बढ़ावा देने का दबाव बनाया गया था। भदौरिया की पहुंच इतनी थी कि पार्किंग के ठेकों का निर्णय लेने के साथ-साथ स्टोर परचेजिंग का अधिकार भी उन्हें दिया गया। कई अधिकारियों ने उनको नोएडा से हटाने का प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हो पाए और वर्ष 2017 में रिटायर होने से 4 माह पहले ही वीआरएस ले ली। इतनी संपत्ति यादव सिंह ने भी नहीं बढ़ाई थी जितना इजाफा भदौरिया की संपत्ति में हुआ।
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आलीशान किले से कम नहीं कोठी
नोएडा के सेक्टर-47 में जिस कोठी को लेकर भदौरिया फंसे हैं वह किसी आलीशान किले से कम दिखाई नहीं देती। जिस मार्बल का इस कोठी में प्रयोग किया गया है वह आम मार्बल नहीं है। जो भी इस कोठी के सामने से गुजरता है, निगाहें ठहर सी जाती हैं। कई नौकर और सुरक्षा गार्ड की तैनाती यहां की गई है। भदौरिया ने सड़क पर ही गार्ड रूम बनवा रखा है।
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