नोएडा का स्थापना दिवस:
कुछ खोया कुछ पाया तो कुछ उम्मीदें अभी भी बाकी
-स्थापना के 44वें वर्ष पर जनता को प्राधिकरण से क्या हैं उम्मीदें
-नोएडा की स्थापना के 43 वर्ष हुए पूरे
सुशील पांडेय
नोएडा, 16 अप्रैल
नोएडा यानी नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना के 43 वर्ष आज पूरे हो गए और यह अपनी स्थापना के 44वें वर्ष में प्रवेश कर गया। स्थापना के 43 वर्ष पूरे होने के बाद पीछे मुड़कर देखने पर कई उपलब्धियां दिखेंगी। साथ ही इतने वर्षों में शहर ने बहुत कुछ खोया भी है। यही नहीं भविष्य की बात की जाए तो आगे कई और उम्मीदें भी नोएडा को पूरी करनी होंगी।
औद्योगिक नगरी होने की वजह से यहां कई बड़ी कंपनियों ने अपने कारोबार की स्थापना की है। यहां आईटी, आईटीईएस, बीपीओ, बीटीओ और केपीओ सेवाओं की पेशकश करने वाले बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा, फार्मा, ऑटो, फास्ट मूविंग उपभोक्ता और विनिर्माण जैसे विभिन्न कार्यों के लिए कंपनियों ने निवेश किया। सैमसंग ने अपनी सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री की स्थापना यहां की, जिससे नोएडा का राजस्व बढ़ा। यहां नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बायलॉजिकल्स, इंडियन एकेडमी ऑफ हाइवे इंजीनियरिंग,, आईसीएआई, आईएमएस, आईआईएम लखनऊ का नोएडा कैंपस, जेपी इंस्टिट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक् नोलॉजी और कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान हैं।
बिल्डरों ने नोएडा का खजाना किया खाली
शहर का विकास होने के दौरान एक समय ग्रुप हाउसिंग का दौर चला। दिल्ली से नजदीक नोएडा को पसंद किया जाने लगा। इसी वजह से यहां बिल्डरों ने प्रोजेक्ट शुरू किया। नोएडा ने बिल्डरों को सपोर्ट करते हुए 10 फीसदी कीमत लेकर जमीनें दे दीं। लेकिन यह निर्णय गलत साबित हुआ। अधिकांश बिल्डरों ने अपने प्रोजेक्ट भी नहीं पूरे किए और न ही नोएडा प्राधिकरण को बकाया 90 फीसदी की राशि दी, जो कि ब्याज सहित 20 से 25 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचने की संभावना है। इस वजह से नोएडा का खजाना खाली हो गया। एक समय हजारों करोड़ रुपये की एफडी रखने वाले नोएडा के पास केवल एक हजार करोड़ की एफडी बची हुई थी। वहीं फ्लैट खरीदार प्रत्येक शनिवार और रविवार को प्रदर्शन के सहारे अपना विरोध दर्ज कराते देखे जा सकते हैं।
कूड़े पर खूब बवाल मचा
बीते एक से दो वर्ष के दौरान शहर में कूड़े के निस्तारण को लेकर काफी बवाल मचा। आबादी बढ़ने के साथ ही घर-घर से ज्यादा कूड़ा निकलने लगा। लेकिन नोएडा प्राधिकरण ने इसकी पहले से व्यवस्था नहीं की थी। इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा और प्राधिकरण को काफी फजीहत झेलनी पड़ी। जगह-जगह लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा। हालांकि अभी अस्थायी तौर पर इसका इलाज ढूंढा गया है और कूड़े के समूल नाश के लिए दो वर्ष का प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
किसानों के आंदोलन से गूंज उठता है शहर
प्राधिकरण ने किसानों का जमीन अधिग्रहण कर लिया। इसके एवज में एक तय राशि दे दी। लेकिन कई किसानों ने मुआवजा नहीं उठाया। अब वह अपनी जमीनें वापस करने की मांग कर रहे हैं, जिन्होंने मुआवजा उठा लिया। वह कोर्ट चले गए और मुआवजे की ज्यादा राशि देने का ऑर्डर लेकर आ गए। अब दूसरे किसान भी उतना ही मुआवजा मांग रहे हैं। ऐसे में शहर में किसानों और प्रशासन के बीच कई बार आर-पार की लड़ाई का दृश्य देखने को मिल जाता है।
मेट्रो, एलिवेटेड रोड, फ्लाईओवर और अंडरपास ने शहर की मुश्किलें की कम
दिल्ली मेट्रो ने कई वर्ष पहले नोएडा सिटी सेंटर तक अपनी राह बनाई, जो कि अब सेक्टर-63 के इलेक्ट्रॉनिक सिटी मेट्रो स्टेशन तक पहुंच गई है। यही नहीं नोएडा से ग्रेटर नोएडा की राह एक्वा लाइन मेट्रो ने आसान की। अब नोएडा से ग्रेटर नोएडा वेस्ट की ओर मेट्रो का प्रस्ताव दिया गया है, जो कि लोगों की मुश्किलें आसान करेगा। इसके अलावा एलिवेटेड रोड, फ्लाईओवर और अंडरपास ने भी शहर की मुश्किलें कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नोएडा ने यह पाया
-हाईटेक सिटी का दर्जा दिया गया है
-मेट्रो से कनेक्टिविटी होने से लोगों को काफी लाभ
-एलिवेटेड रोड का तोहफा
-कई अंडरपास का लाभ
-क्रिकेट स्टेडियम सहित कई अन्य खेल परिसर की योजना प्रस्तावित
-एयरपोर्ट का मिलेगा लाभ
-शहर में 375 किलोमीटर लंबे रोड नेटवर्क से जुड़ा
-एक्सप्रेसवे होने से वाहनों की गति बढ़ी
-कई एकड़ में बने औषधि पार्क सहित अन्य पार्क
-औद्योगिक सेक्टर में निवेशकों का भरोसा जीता
-कई बड़ी कंपनियों ने शहर को अपनाया
नोएडा ने यह खोया
-फ्लैट खरीदारों का भरोसा खोया
-कंक्रीट का जंगल बसाने में हरियाली खोई
-प्राधिकरण में सीबीआई जांच की आंच से हुई किरकिरी
-सीएजी की टीम के ऑडिट से नोएडा पर उठी उंगली
-किसानों का मुआवजे का दर्द अभी भी नहीं हुआ कम
-विकास की तेज रफ्तार में प्रदूषण बढ़ने से स्वच्छ हवा गायब
-कूड़े का इंतजाम नहीं होने से लोगों का गुस्सा झेला
-क्राइम का ग्राफ बने रहने से लोगों का भरोसा खोया
-किसानों के जमीन अधिग्रहण से खेती खत्म होने के कगार पर
नोएडा से यह है उम्मीदें
-आबादी के विनियमितिकरण से किसानों को लाभ देना
-कूड़े का पूरी तरह से निस्तारण करना
-स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में शहर को नंबर-1 बनाना
-5 प्रतिशत मुआवजे की मांग को पूरा करना
-फ्लैट खरीदारों को उनका हक दिलाना
-शहर को जाम से मुक्त करने के लिए रोड इंजीनियरिंग में परिवर्तन करना
-शहर में लोगों को सुरक्षा सुनिश्चित करना
-सार्वजनिक परिवहन के साधनों को बढ़ाने का लक्ष्य
-सिटीजन चार्टर के लक्ष्य को पूरा करना
-सेवाओं को पूरी तरह से ऑनलाइन करने पर जोर देना
-शहर को प्रदूषण मुक्त करने के लिए उपाय करना
-खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए बेहतर खेल संसाधनों को पूरा करना
नोएडा की स्थापना का यह था मकसद
17 अप्रैल 1976 को नोएडा की स्थापना हुई। यह 1975 से 1977 के आपातकाल के दौरान अस्तित्व में आया। उस दौरान शहरीकरण पर पूरा जोर था और उस समय की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र और कांग्रेस नेता संजय गांधी की पहल से यूपी औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम के तहत इसकी स्थापना की गई। शुरूआती लक्ष्य औद्योगिक शहर बसाने का था। बाद में धीरे-धीरे आवासीय सेक्टर बढ़ने लगे और अब तो ग्रुप हाउसिंग की ऊंची-ऊंची इमारतों ने पूरा सीन बदल दिया है।
शहर को बसाने वालों का यह कहना है:-
शहर को फ्री होल्ड करने से पहले जनसंख्या घनत्व पर हो विचार
शहर को आंतरिक परिवहन की जरूरत है। साथ ही पुराने सेक्टरों में रोजाना की समस्या से छुटकारे के उपाय ढूंढने होंगे। यहां एक स्थायी सब्जी मार्केट की बेहद जरूरत है। शहर में बिजली पहले सेे कम जाती है। पानी की सप्लाई को और बेहतर करने की जरूरत है। शहर को फ्री होल्ड करने से पहले जनसंख्या के घनत्व पर भी विचार विमर्श कर लेना चाहिए। शहर के नाले को ढकने और बीच-बीच में नाले से गैस के निकलने की व्यवस्था करनी होगी ताकि लोगों को समस्या का समाधान मिल सके।
-डीडी मिश्रा, पूर्व चेयरमैन और सीईओ नोएडा प्राधिकरण
केवल पांच लाख की आबादी के लिए बनाया था प्लान
1979 में नोएडा प्राधिकरण में बतौर मुख्य कार्यपालक अधिकारी मैने नोएडा शहर की प्लानिंग की थी और केवल 5 लाख की आबादी के लिए सारे संसाधनों का खाका खींचा था। लेकिन अब आबादी 10 और 12 लाख के पार जा रही है। प्राधिकरण को नए आवासीय और कमर्शियल स्कीम का दबाव और नहीं बढ़ाना चाहिए नहीं तो विस्फोटक हालात हो जाएंगे। अब केवल कल्चरल, एजूकेशनल, सड़क, बिजली, पानी पर ध्यान देना चाहिए और इसे और सुधारने पर काम करना चाहिए। नई आबादी के लिए ग्रेटर नोएडा में संभावनाओं की तलाश की जा सकती है।
-सुशील त्रिपाठी, पूर्व सीईओ नोएडा प्राधिकरण
यातायात व्यवस्था बहाली के लिए हो सख्ती
शहर बेहतर डेवलप हो चुका है। लेकिन यहां ट्रैफिक जाम की स्थिति के लिए और ट्रैफिक पुलिस की जरूरत है। यातायात नियमों के पालन के लिए जागरूकता के साथ सख्ती की जरूरत है। चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों की जरूरत है। शहर में बिजली व्यवस्था अच्छी बनी है। लेकिन अभी भी कहीं-कहीं फ्लाईओवर के नीचे अंधेरा होता है। यहां इंडस्ट्री सेक्टर में इंडस्ट्रियल थाने और इंडस्ट्रियल सीओ होने चाहिए। इंडस्ट्रियल रॉ मैटेरियल के लिए एक बाजार की जरूरत है। यहां बाहर से पढ़ाई करने के लिए आने वाले बच्चों के लिए पीजी और हॉस्टल की सुविधा भी होनी चाहिए।
-योगेंद्र नारायण, पूर्व चेयरमैन और सीईओ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण
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सुशील पांडेय