एक लाख के इनामी बावरिया बिजवा को मुठभेड़ में लगी गोली, गिरफ्तार
ग्रेटर नोएडा। एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की नोएडा यूनिट ने एक लाख के इनामी बदमाश विजय सिंह उर्फ बिजवा निवासी अलीगढ़ को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। जबकि उसके दो साथी फरार हो गए। मुठभेड़ में बदमाश के पैर में गोली लगी है और दो पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए हैं। तीनों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बदमाश के कब्जे से एक तमंचा, कारतूस व बाइक बरामद की है।
पुलिस के मुताबिक विजय सिंह उर्फ बिजवा पर वर्ष 2017 में गोंडा के इलाहाबाद बैंक में 50 लाख की डकैती का आरोप है। घटना में ईकोटेक-1 थाना पुलिस ने 12 जनवरी को मुठभेड़ में दो आरोपियों समय सिंह और दीपक को गिरफ्तार किया था। जबकि बिजवा फरार हो गया था। इसके बाद बिजवा और उसके साथियों ने प्रतापगढ़ में भी कैश वैन लूटने के प्रयास में सुरक्षागार्ड की हत्या कर दी थी।
सीओ एसटीएफ आरके मिश्रा ने बताया कि रविवार दोपहर टीम को सूचना मिली कि 2017 में गोंडा बैंक डकैती में शामिल बदमाश विजय सिंह बावरिया उर्फ बिजवा निवासी बालूखेड़ा (अलीगढ़) सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र में अपने साथियों से मिलने आने वाला है। सूचना पर एसटीएफ की टीम व सूरजपुर पुलिस ने औद्योगिक क्षेत्र में घेराबंदी की। इस दौरान बदमाशों को भी भनक लग गई और उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में एक गोली बिजवा के दाएं पैर में घुटने के नीचे जा धंसी और वह गिर पड़ा। टीम ने बिजवा को दबोच लिया। जबकि उसके दो साथी भाग निकले।
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डकैती की रकम से खरीदी कार और ऑटो
एसटीएफ ने जानकारी दी है कि बिजुवा ने गोंडा में डकैती की रकम से एक कार खरीदी और उसे टैक्सी में चलाने लगा। वहीं, बिजुआ के साथी समय सिंह और दीपक ने लूट की रकम से ऑटो खरीदा था। जनवरी में गिरफ्तारी से पहले दोनों ने बाराबंकी में लंबे समय तक ऑटो चलाया था। वहीं, दोनों ने लूट की रकम से ही हरियाणा के नुहू जिले के गांव आटा में मकान भी खरीदा था। लूट के बाद बदमाश विभिन्न जिलों में नाम बदल कर रहते थे और फर्जी पहचानपत्र बनवा लेते थे। बावरिया बिजुवा अलीगढ़, हरियाणा, बाराबंकी व मथुरा में रह चुका है। हर जिले में लोग उसे अलग नाम से पहचानते हैं।
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सीसीटीवी में कैद होनेे के बाद हुई पहचान
सीओ एसटीएफ ने बताया कि बिजवा व उसके साथी प्रतापगढ़ में एसबीआई की कैश वैन लूट केे प्रयास और सुरक्षागार्ड की हत्या की घटना को अंजाम देने के दौरान सीसीटीवी में कैद हो गए थे। आरोपियों के फोटो लुकसर जेल में बंद अन्य गिरोह के अन्य सदस्यों को दिखाए गए थे। इसके बाद ही आरोपियों की पहचान हुई थी। तभी से पुलिस उनकी तलाश में थी।