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लोन दिलाने के नाम पर 1.3 करोड़ रुपये की ठगी करने वाला गिरफ्तार

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लोन का झांसा देकर 1.3 करोड़ रुपये की ठगी करने वाला गिरफ्तार
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- खुद को इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बताकर करता था वारदात
- अदालत इस मामले में कर चुकी है भगोड़ा घोषित, 25 हजार था इनाम

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने अस्पताल मालिक को इंश्योरेंस कंपनी से हाउसिंग लोन दिलाने का झांसा देकर 1.3 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले रविंदर सिंह (59) को गिरफ्तार किया है। वह नांगलोई का रहने वाला है। उसपर पुलिस ने 25 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। आरोपी खुद को इंश्योरेंस कंपनी का कर्मचारी बताकर वारदात करता था। ग्वालियर निवासी पीड़ित दिल्ली में भी अस्पताल खोलना चाहता था।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉक्टर ए के सिंघला ने बताया कि वर्ष 2014 में ग्वालियर निवासी अस्पताल मालिक अमरजीत सिंह भल्ला ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में ठगी की शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने बताया कि वह अपने अस्पताल का एक शाखा दिल्ली में खोलना चाहता था। इसके लिए उसे लोन की जरूरत थी। इसी बीच पीड़ित की मुलाकात रविंदर सिंह से हुई, जिसने बताया कि वह इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी का अधिकारी है। उसने बताया कि वह उसे एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से करोड़ों का लोन दिलवा सकता है।
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सितंबर 2012 में वह अपने दो सहयोगियों जय प्रकाश शर्मा और रविंद्र दूबे के साथ पार्लियामेंट स्थित इंटरनेशनल क्लब में मिला, जहां आरोपियों ने आवेदन शुल्क के नाम पर 55 हजार रुपये ले लिए। उसके बाद रविंदर सिंह अक्तूबर से दिसंबर 2012 के बीच कई बार ग्वालियर आया और 50 करोड़, 40 करोड़, 40 करोड़ और फिर 20 करोड़ के चार आवेदन भरवाए। इस तरह से आरोपियों ने उससे 1.3 करोड़ रुपये ले लिए। एक करोड़ रुपये गंवाने के बावजूद जब पीड़ित को लोन नहीं मिला तो वह खुद को ठगा महसूस कर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में शिकायत दर्ज करवाई।
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पुलिस ने मामले की छानबीन करते हुए चंद्रकांत सोनी और सागर चांदनी नाम के दो आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जबकि रविंदर फरार हो गया। इसके बाद अदालत ने इस मामले में रविंदर को भगोड़ा घोषित कर दिया। पुलिस ने उसपर 25 हजार रुपये का इनाम रखा। 7 अक्तूबर को पुलिस को सूचना मिली कि रविंदर अपने किसी परिचित से मिलने के लिए नेताजी सुभाष प्लेस आने वाला है। निरीक्षक आशीष के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। रविंदर सिंह कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के बाद दिल्ली आ गया। यहां उसने परचून की दुकान चलाई। लेकिन इससे होने वाले कमाई से वह खुश नहीं था। उसने अपने पांच सहयोगियों के साथ मिलकर ठगी की वारदात को अंजाम देने लगा।
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