हाईकोर्ट ने हत्या के आरोप में 2009 से उम्रकैद की सजा काट रहे सॉफ्टवेयर इंजीनियर को दो सप्ताह की फरलो देने में देरी पर तिहाड़ जेल महानिदेशक को तलब किया है। हाईकोर्ट ने उनसे पूछा है कि याची के फरलो आवेदन का निबटारा होने में एक माह का समय क्यों लगा और जेल के किस अधिकारी ने इस प्रक्रिया में कितना समय लगाया।
जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने जेल महानिदेशक को पेश होने व शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई एक अक्तूबर को तय की है। याची ने अधिवक्ता अक्षय भंडारी के जरिये याचिका दायर कर कहा है कि जेल अधिकारियों ने राहुल देव को 24 अगस्त को दो सप्ताह की फरलो दी थी। उस समय 2017-18 की वार्षिक सजा पूरी होने में केवल एक सप्ताह ही बचा था। उसकी वार्षिक सजा 30 अगस्त 2018 को पूरी हो रही थी। इसलिए उसे फरलो पर जेल से नहीं छोड़ा जा सका। याचिका में कहा गया है कि नियम के मुताबिक किसी भी दोषी को एक साल में एक बार तीन सप्ताह व दो बार दो-दो सप्ताह की फरलो देने का प्रावधान है। फरलो एक तरह से सजा में छूट है।
याची के वकील ने कोर्ट के समक्ष यह भी कहा कि जेल अधीक्षक व उपाधीक्षक उन कैदियों के शपथ पत्र को सत्यापित नहीं करते, जो अपनी अपील या जमानत के लिए निजी वकील करते हैं। वह केवल उन कैदियों के शपथ पत्र सत्यापित करते हैं, जो लीगल ऐड का वकील लेते हैं। कोर्ट ने इस मुद्दे पर संबंधित नियम पेश करने का निर्देश जेल महानिदेशक को दिया है।