-औषधि विभाग के निरीक्षक ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में दर्ज कराया है मुकदमा
-एंटीबायोटिक की दो नकली दवा बेचने पर डाढ़ा गांव के रिचा मेडिकल स्टोर पर भी मुकदमा दर्ज
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। कोरोना के इलाज में प्रयोग होने वाली फेराविर दवा औषधि विभाग की जांच में मानकों पर खरी नहीं उतरी। अब विभाग ने दवा निर्माता फर्म समेत चार के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में मुकदमा कराया है। फर्म ने दवा के अन्य बैच की जानकारी भी विभाग को नहीं दी थी। वहीं नकली दवा बेचने पर डाढ़ा गांव के मेडिकल स्टोर संचालक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया गया है।
जिला औषधि निरीक्षक वैभव बब्बर ने बताया कि कोरोना काल में फेराविर टेबलेट की काफी मांग थी। इलाज में इस दवा का प्रयोग किया गया। जून, 2021 में दादरी स्थित मंगला मेडिकल स्टोर से फेराविर टेबलेट का नमूना लिया गया। तीन माह बाद रिपोर्ट आने के बाद जांच शुरू की गई। दवा बनाने वाली फर्म मास्कोट हेल्थ सीरीज हरिद्वार से जवाब मांगा गया। फर्म ने दवा बनाने की बात स्वीकार की, लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं दी। औषधि निरीक्षक ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद फर्म के साथ निर्माण केमिस्ट, विश्लेषण केमिस्ट और औषधि को मार्केट में रिलीज करने वाले तीन व्यक्तियों के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर किया गया है। उन्होंने बताया कि औषधि अधिनियम 1940 के तहत पांच साल की सजा और एक लाख रुपये के अर्थदंड लग सकता है।
110 रुपये की थी एक टेबलेट
अफसरों ने बताया कि कोरोना के इलाज में फेराविर दवा की काफी मांग रही थी। यह एक एंटीवायरल दवा है। यह दवा काफी महंगी है। एक टेबलेट 110 रुपये की है। एक व्यक्ति को 22 टेबलेट दी जाती थी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में यह दवा काफी बिकी थी।