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Noida News: एयरपोर्ट के करीब 1108 एकड़ जमीन को लेकर विवाद, यूपी-हरियाणा के किसान आमने-सामने

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एयरपोर्ट के करीब 1108 एकड़ जमीन को लेकर विवाद, यूपी-हरियाणा के किसान आमने-सामने
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- जेवर के फलैदा खादर के किसानों का दावा ग्राम प्रधान ने किसानों को पट्टे पर आवंटित की जमीन
- यमुना के कटान से यूपी में जमीन आने का दावा कर रहे हरियाणा के सोलड़ा गांव निवासी किसान
मनोज कुमार शर्मा
जेवर। दशकों से चला आ रहा हरियाणा और प्रदेश के बीच सीमा विवाद जेवर में एक बार फिर से नए रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद सहारनपुर से मथुरा तक यमुना नदी के किनारे की जमीन का विवाद दीक्षित अवार्ड के तहत सुलझा दिया गया था। लेकिन नोएडा एयरपोर्ट के करीब की बेशकीमती 1108 एकड़ जमीन को लेकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। शनिवार को जमीन के मालिकाना हक को लेकर दोनों प्रदेश के किसान संबंधित कागजात लेकर तहसील और सबरजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे। दोनों ही पक्ष सर्व विभाग के कर्मचारियों पर आरोप लगाने लगे। एसडीएम का कहना है कि इस मामले में गहनता से दोनों पक्षों की बात सुनकर व उनके कागजात देखने के बाद विवाद सुलझाया जाएगा।
यमुना नदी में आने वाली बाढ़ और उससे होने वाले कटाव के चलते हरियाणा और यूपी के किसानों में आये दिन विवाद रहता था। पूर्व में कई बार हिंसक झड़प व गोलियां भी चल चुकी हैं। इसके निपटारे के लिए दीक्षित अवार्ड के तहत दोनों राज्यों की सीमा के निर्धारण पर सहमति बनी थी। दोनों राज्यों की सीमाओं के निर्धारण के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सर्वे ऑफ इंडिया की तरफ से पिलर भी लगा दिए गए। लेकिन दीक्षित अवार्ड के तहत कुछ जमीन हरियाणा से यूपी में आई, जिसको हरियाणा के राजस्व रिकार्ड में से यूपी के राजस्व रिकार्ड में दर्ज किया जाना था। लेकिन अब तक यह कार्य पूरा नहीं हुआ और सर्वे विभाग के अधीन ही चल रहा है। अब नोएडा एयरपोर्ट के निर्माण से ये जमीन बेशकीमती हो गई है। शनिवार को तहसील में पहले जेवर क्षेत्र के फलैदा गांव निवासी ग्रामीण जमीन को अपना बताकर हरियाणा के किसानों पर आरोप लगा हंगामा करने लगे। इसके बाद हरियाणा के सोलड़ा गांव के किसान भी कागजातों से भरा बक्सा लेकर पहुंच गए।
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स्टे समाप्त होने पर हरियाणा के किसानों ने शुरू किया जमीनों का क्रय विक्रय

वर्ष 1984 में दीक्षित अवार्ड के तहत हरियाणा के पलवल के सोलड़ा के किसानों की 1108 एकड़ जमीन यूपी में हस्तांतरित की गई थी। सोलड़ा के किसानों के जमाबन्दी के आधार पर यूपी के राजस्व रिकार्ड में नाम दर्ज किए जाने थे। लेकिन फलैदा के लोगों ने 1778 में फर्जी तरीके से 485 पट्टे कराते हुए 1988 में विवाद शुरू कर दिया। हरियाणा के किसान विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जहां से सन 2000 में मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। वर्ष 2002 में हाईकोर्ट ने हरियाणा के किसानों के पक्ष में फैसला सुना दिया। साथ ही वर्ष 2003 से 10 तक सभी पट्टे भी खारिज करा दिए। लेकिन फलैदा के किसानों ने सर्वे पर सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले लिया। कुछ दिनों पहले हरियाणा के किसानों ने सुप्रीम कोर्ट से स्टे तुड़वा दिया। जिसके आधार पर अपनी जमीनों का क्रय विक्रय जेवर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में शुरू करा दिया। इसी को लेकर फलैदा के किसान विरोध कर रहे हैं।

मिली भगत का अरोप लगा रहे फलैदा के किसान
वर्ष 1984 में दीक्षित अवार्ड के तहत हरियाणा से मात्र 3.25 एकड जमीन यूपी को हस्तांतरित की गई थी। 1978 से ही ग्राम प्रधान ने 1105 एकड़ जमीन में फलैदा के किसानों के लिए कृषि के लिए पट्टे आवंटित किए थे। वर्तमान में सोलड़ा हरियाणा के किसान सर्वे के कुछ अधिकारियों एवं सब रजिस्ट्रार कार्यालय के साथ मिलीभगत कर फलैदा के किसानों की जमीन का क्रय विक्रय कर रहे हैं। जबकि वास्तव में जमीन फलैदा के किसानों की है।
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जेवर के फलैदा व हरियाणा के सोलड़ा के किसानों के बीच 1108 एकड़ जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। शनिवार में दोनों पक्ष के किसान तहसील पहुंचे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही जिला स्तर पर सर्वे, तहसील, रजिस्ट्री विभाग के अलावा दोनों जगह के किसानों के साथ बैठक करते हुए मामले का हल निकाला जाएगा।
अभय कुमार सिंह, उपजिलाधिकारी जेवर
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