ग्रेटर नोएडा। सांसद डॉ. महेश शर्मा ने शुक्रवार को अमर उजाला से कहा कि मेरा त्यागी समाज से किसी तरह का कोई द्वेष नहीं है। श्रीकांत की गिरफ्तारी की मांग एक जनप्रतिनिधि के रूप में की थी। यदि श्रीकांत प्रकरण के बाद आला अधिकारी सोसाइटी में पुलिसकर्मी तैनात करते तो युवक घुस नहीं पाते।
पुलिस ने खामियों को छिपाने के लिए थानेदार को निलंबित कर दिया। तीन संगठनों की ओर से पत्र लिखे गए हैं। इनमें दो संगठन एक ही विधानसभा से हैं। तीनों एक ही लिखावट के भी हैं। इससे पता चलता है कि कुछ लोग साजिश रच रहे हैं। पिछले दिनों ही प्रदेशाध्यक्ष का पद खाली हुआ है। इसके लिए मेरा नाम चल रहा था। बस यही बात कुछ लोगों को हजम नहीं हुई।
ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी में हंगामे की सूचना पर पार्टी के आला पदाधिकारियों ने कॉल करके तत्काल मौके पर जाने के लिए कहा था। वहां पहुंचा तो सोसाइटी में छह युवकों के प्रवेश पर हंगामा चल रहा था। स्थानीय लोगों ने पहले ही इन युवकों को पुलिस को सौंप दिया था। त्यागी समाज से इस पूरे प्रकरण का कोई लेना-देना नहीं था। जिले के त्यागी समाज से हमेशा मेरे पारिवारिक रिश्ते रहे हैं, यह मुद्दा केवल श्रीकांत तक सीमित था। न तो मैंने श्रीकांत पर गैंगस्टर एक्ट लगवाने के लिए कहा और न ही सोसाइटी में घुसने वाले युवकों को गिरफ्तार कराया था। दोनों काम पुलिस ने किए हैं।