आम आदमी पार्टी मुख्यालय के बाहर किया प्रदर्शन, इस्तीफा दो के नारे लगाए
डीटीसी घोटाला मामले में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का भी इस्तीफा मांगा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आबकारी नीति घोटाला मामले में मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की है। प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार के नेतृत्व में बुधवार को पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इसके समर्थन में आम आदमी पार्टी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने ‘केजरीवाल इस्तीफा दो, सिसोदिया-सत्येन्द्र तो झांकी है, पूरी कैबिनेट अभी बाकी है’ के नारे लगाते हुए डीटीसी घोटाला मामले में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का भी इस्तीफा मांगा।
प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार ने आबकारी नीति घोटाले की निष्पक्ष जांच में सहयोग करने सहित मुख्यमंत्री से भी इस्तीफा मांगा। उन्होंने दावा किया कि आबकारी नीति लागू होने के बाद से कांग्रेस भ्रष्टाचार का आरोप लगाती रही है। अब इसकी सच्चाई सामने आने के बाद दबाव में मनीष सिसोदिया और सत्येन्द्र जैन को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार में गहलोत एक और भ्रष्ट मंत्री हैं, जिन्होंने डीटीसी बसों की खरीद और रखरखाव में 4288 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। दिल्ली कांग्रेस ने 13-14 जुलाई 2021 को केंद्रीय सतर्कता आयोग और सीबीआई को इस संबंध में 1000 पेज के दस्तावेज सौंपे थे। इसके बाद संज्ञान लेते हुए सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। केजरीवाल ने कैलाश गहलोत को मंत्री पद से हटाने की जगह आठ अन्य विभागों की जिम्मेदारी सौंप दी। जांच झेल रहे मंत्री को सजा की जगह इनाम दिया गया, क्योंकि वे केजरीवाल के राजदार हैं। सिसोदिया और सत्येन्द्र जैन के इस्तीफा देने के बाद केजरीवाल का सौरभ भारद्वाज और आतिशी को मंत्री पद की जिम्मेवारी सौंपना दर्शाता है कि उनके पास साफ छवि वाला कोई विधायक नहीं है जिसे मंत्री बना सकें।
आतिशी व सौरभ पर साधा निशाना
अनिल कुमार ने निशाना साधते हुए कहा कि पहली बार जब आम आदमी पार्टी की सरकार बनी तो उस समय मंत्री रहते हुए सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली जल बोर्ड में घोटाला किया किया था, इसलिए उन्हें 2015 में दूसरी बार मौका नहीं दिया गया। कालकाजी से विधायक आतिशी को मेयर चुनाव में सभी ने देखा है कि कैसे उनके आदेश पर सदन में पार्षदों ने हंगामा कर संवैधानिक प्रक्रिया और लोकतंत्र की मर्यादाओं को शर्मसार किया। अनिल कुमार ने कहा कि केजरीवाल खुद बगैर किसी विभाग के 9 वर्षों से ईमानदारी का चोला ओढ़कर बैठे हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने सवाल किया कि आखिर क्या वजह है कि केजरीवाल ने मुख्यमंत्री होने के बावजूद किसी विभाग की जिम्मेदारी नहीं ली। भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी प्रशासन का दावा करने वाले केजरीवाल के 9 वर्षों के शासन के अधिकांश मंत्री और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की जांच चल रही है। सिसोदिया, जैन, राजेन्द्रपाल गौतम, जितेन्द्र तोमर और सोमनाथ भारती को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा, जबकि दूसरे मंत्रियों पर भी आरोप है। वक्फ बोर्ड और टैंकर मालिक की हत्या मामले में भी पार्टी के दो नेताओं पर केस चल रहा है।
नौ साल में हजारों करोड़ के कई घोटाले हुए
प्रदेश अध्यक्ष ने सीधा निशाना साधा कि मुख्यमंत्री के संरक्षण में दिल्ली सरकार में 10,000 करोड़ का शराब घोटाला, 4288 करोड़ का डीटीसी बस खरीद घोटाला, क्लास रूम घोटाला, राशन घोटाला, ऑक्सीजन घोटाला, एप आधारित बस सर्विस घोटाला, वक्फ बोर्ड घोटाला, 2600 करोड़ का जल बोर्ड घोटाला, पीडब्लूडी घोटाला, शहरी आश्रय बोर्ड शौचालय घोटाला हुआ। भ्रष्टाचार के सभी मामले दिल्ली की जनता के सामने हैं जिनकी जांच एजेंसियां कर रही हैं। 9 वर्षों के दौरान हुए घोटालों की फेहरिस्त को देखते हुए नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।