गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट से खत्म होंगे कचरे के पहाड़
यमुना के बाद एलजी के नेतृत्व में गठित समिति को सौंपा कचरे की सफाई का जिम्मा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उपराज्यपाल विनय सक्सेना की अध्यक्षता में ठोस अपशिष्ट निगरानी समिति का गठन किया है। उपराज्यपाल की देखरेख में भलस्वा, गाजीपुर और ओखला से करीब 30 लाख मीट्रिक टन ठोस कचरे का निपटान किया गया। इसे देखते हुए एनजीटी ने कचरे की तीनों पहाड़ियों को समतल करने की जिम्मेदारी समिति को सौंपी है। इससे पहले यमुना की सफाई के लिए एलजी की अध्यक्षता में प्राधिकरण ने एक समिति गठित की है।
पदभार संभालने के बाद से उपराज्यपाल ने तीनों लैंडफिल साइट पर इकट्ठा कचरे का निपटान करने की दिशा में पहल की। तीनों साइट से हर माह करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन ठोस कचरे का निपटारा किया जाता है। वर्ष 2019 से जून-22 के दौरान हर माह 1.4 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे (लिगेसी वेस्ट) का निपटान किया जा रहा है। अब तक 51 लाख मीट्रिक टन ठोस कचरे का निपटान किया गया है। वहीं, एनजीटी ने 16 फरवरी को जारी आदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 व अन्य पर्यावरण मुद्दे और सुप्रीम कोर्ट के 2014 और 2017 की तरफ से इस संदर्भ में जारी आदेशों के अनुपालन के लिए किए गए प्रयासों पर गहरा असंतोष जताया है। पिछले 18 वर्षों में सुप्रीम कोर्ट और नौ वर्षों से प्राधिकरण के प्रयासों के बावजूद दिल्ली में कचरे के तीन पहाड़ों की समस्या को नहीं सुलझाया गया। एनजीटी ने नई समिति की तरफ से जवाबदेही तय करने और यमुना निगरानी समिति की तर्ज पर निगरानी के लिए दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण सहित दूसरी एजेंसियों को शामिल किया है। ठोस कचरे की बढ़ती समस्या को देखते हुए इसके निपटारे के लिए एनजीटी ने उपराज्यपाल के नेतृत्व में ठोस अपशिष्ट निगरानी समिति का गठन का फैसला लिया है। दिल्ली के एलजी के नेतृत्व में गठित समिति में संयोजक के तौर पर दिल्ली के मुख्य सचिव होंगे, जबकि शहरी विकास, वन एवं पर्यावरण, कृषि, और वित्त सचिव सहित डीडीए के उपाध्यक्ष, डीडीए सहित सचिव सहित दूसरे अधिकारी सहित नामित सदस्यों के अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष, दिल्ली नगर निगम के आयुक्त, न्यायिक जिला मजिस्ट्रेट और डीसीपी भी शामिल होंगे। समिति को ठोस अपशिष्ट के आंकड़ों का संकलन करने और तिमाही आधार पर ग्राफ तैयार करने का भी निर्देश दिया गया है।
जनहित में कॉरपोरेट से बातचीत में सक्षम है समिति
एनजीटी ने आदेश में कहा है कि समिति को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रसंस्करण, मौजूदा अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार सहित पुराने अपशिष्ट स्थलों में बदलाव करने के अलावा संबंधित विभागों के साथ समन्वय का अधिकार होगा। साप्ताहिक बैठक या मौके का जायजा लेने के लिए भी समिति को सक्षम बताया गया है। एनजीटी के निर्देशों के पालन, उल्लंघन, प्रस्तावित उपचारात्मक कार्रवाई, कानूनी अनुपालन फंडिंग, पर्यावरण मुआवजे का उपयोग, पिछली विफलताओं के लिए जवाबदेही तय करने सहित परियोजनाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों के निष्पादन में समय-सीमा सहित दूसरे पहलुओं को देखने का समिति को अधिकार होगा। समिति को वित्त पोषण, अलग समर्पित खाता खोलने पर विचार करने या विशेषज्ञों को शामिल करने, वेबसाइट बनाने सहित दूसरे अधिकार भी दिए गए हैं। समिति जनहित में कॉरपोरेट के साथ बातचीत के लिए भी पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगी।