झील, तालाबों को बचाने में आचार संहिता आड़े नहीं आती-
-एनजीटी ने चुनाव के नाम पर कार्रवाई से बचने पर अधिकारियों से जताई नाराजगी
- निगरानी के लिए नियुक्त किया एमिकस क्यूरी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। झील, तालाब समेत जल स्रोतों को कब्जा मुक्त कराने और इनको संरक्षित करने के लिए कार्रवाई करने की जगह आचार संहिता लागू होने का बहाना बनाने वाले अधिकारियाें पर एनजीटी ने नाराजगी जताई है। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि पर्यावरण संरक्षण के कामों को चुनाव आचार संहिता नहीं रोकती। इसके अलावा तालाब, झीलों के संरक्षण और कब्जों की स्थिति की निगरानी के लिए एनजीटी ने एमिकस क्यूरी की भी तैनाती कर दी है।
पर्यावरणविद् अभिष्ट गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी के सदस्य जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और डॉ. अफरोज अहमद ने अपने आदेश में कहा, 109 मामले रेवेन्यू कोर्ट के आगे तालाबों पर कब्जे के लंबित हैं। ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए एमिकस क्यूरी के रूप में अधिवक्ता की तैनाती निगरानी के लिए जरूरी है। एमिकस क्यूरी के रूप में गौरव अग्रवाल, अधिवक्ता को नामित किया गया है। उनका काम निरीक्षण कर मौके की रिपोर्ट देना होगा। इसका खर्च यूपीपीसीबी उठाएगा। नोएडा, ग्रेनो प्राधिकरण, यीडा तालाबों को संरक्षित करने के लिए अपना एक्शन प्लान भी देंगे। यह एक्शन प्लान 15 मई से पहले एनजीटी को देना है।
अभिष्ट गुप्ता ने बताया कि एमिकस क्यूरी की तैनाती से तालाब, झीलों के संरक्षण की हकीकत सामने आ जाएगी। वहीं प्राधिकरणों को भी यह बताया है कि इस काम को कब तक पूरा कर लिया जाएगा? कितना बजट उनको खर्च इन प्रोजेक्ट पर खर्च करना है। जल स्त्रोतों को कब्जा मुक्त कराने के लिए यह महत्वपूर्ण होगा।