तावडू। तावडू को गुरुग्राम में मिलाने की विधायक की मांग पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल पूरी तरह चुप्पी साध गए। इसकी वजह से उपमंडलवासियों सहित विधायक को मायूसी हाथ लगी। दरअसल, 2005 में नूंह जिला बनने के बाद से ही कुछ लोग तावडू को गुरुग्राम में मिलाने की मांग कर रहे हैं। जबकि कुछ लोग नूंह जिला का ही हिस्सा बना रहना चाहते हैं। 2014 में स्थानीय विधायक व भाजपा के शीर्ष नेताओं ने चुनावी प्रचार के दौरान भाजपा सरकार बनने पर इस मांग को सिरे चढ़ाने का आश्वासन दिलाया था। लेकिन पांच साल बाद यह मांग सिरे नहीं चढ़ी। किसान सम्मेलन में सीएम के संबोधन से पहले बोलते हुए स्थानीय विधायक तेजपाल तंवर ने अपनी उपलब्धियों को गिनाते हुए तावड़ू को गुरुग्राम में शामिल करने की मुख्यमंत्री से मांग की। लेकिन विधायक की इस मांग पर मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं बोला। इस पर तावड़ू वासियों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी। हालांकि आचार संहिता के चलते सीएम से इलाके वासियों को किसी तरह की बड़ी घोषणा की उम्मीद नहीं थी। बल्कि इस मांग पर कुछ आश्वासन मिलने की जरूर उम्मीद थी।