-सार्वजनिक परिवहन के नाम पर शहर में नहीं है कोई ठोस व्यवस्था
- जिले में संचालित 19,611 ऑटो में से 3446 खटारा हालत में, 2437 फैला रहे प्रदूषण
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में मेट्राे के अलावा सार्वजनिक परिवहन के नाम चल रहे एक मात्र ऑटो में सफर करना खतरे से खाली नहीं है। जिले में दौड़ रहे 19611 ऑटो में से 3446 खटारा हो चुके हैं। ऐसे में इन ऑटो में सफर करने वाले लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। परिवहन विभाग की मानें तो फिटनेस समाप्त हो चुके ऑटो के संचालकों को नोटिस भी भेजा गया है, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, लोगों की सुविधा के लिए सिटी बस चलाने की योजना भी फेल हो गई।
दिल्ली से सटे हाइटेक शहर की ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों को आज भी सार्वजनिक परिवहन के लिए तरसना पड़ रहा है। हर जगह मेट्रो की सुविधा नहीं होने से लोगों को ऑटो में सफर करना पड़ रहा है। ऑटो एसोसिएशन के अनुसार एक दिन में पांच से सात लाख लोग ऑटो से सफर करते हैं। लोगों का कहना है कि साल-दर-साल शहर का दायरा तो बढ़ता गया, लेकिन सिटी बसों का संचालन नहीं हो सका।
2437 ऑटो हवा को बना रहे जहरीला
जिले में 2437 ऑटो ऐसे हैं जो हवा को प्रदूषित कर रहे हैं। दरअसल, इनके प्रदूषण प्रमाण पत्र की अवधि समाप्त हो गई है। संचालकों ने ऑटो की प्रदूषण जांच नहीं कराई है। विभाग की ओर से ऐसे ऑटो संचालकों को चेतावनी भी दी गई है। फिर भी इस पर खास ध्यान नहीं दिया गया। वहीं 4543 ऑटो बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं।
ऑटो चालक करते हैं मनमानी
ऑटो चालक क्षमता से अधिक सवारियां बैठाते हैं। करीब 12 हजार ऑटो ऐसे हैं जिनमें मीटर तक नहीं लगे हैं। ऐसे में ऑटो चालक सवारियों से मनमाना किराया वसूलते हैं। परिवहन विभाग की ओर से उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
मेट्रो की एसी बस सेवा भी नहीं चली
मेट्रो रेल की ओर से नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच एसी बस सेवा की शुरुआत की गई थी। लेकिन यह ज्यादा दिन तक नहीं चल पाई। किराया अधिक होने से यात्री रोडवेज बसों में सफर करना पसंद करते थे। इसके अलावा इन बसों में एक मेट्रो स्टेशन से दूसरे तक यात्रियों को बैठाया जाता था। घाटा होने के कारण इसे बंद कर दिया गया।