नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने कहा है कि वर्दीधारी सेवा में शामिल होने वाला व्यक्ति असहज स्थिति का सामना करने पर अपने कर्तव्य से विमुख नहीं हो सकता। न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने कहा कि सेवा में उतार-चढ़ाव जीवन का एक हिस्सा हैं। सेवा में शामिल होने वाले व्यक्ति को इन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह कहते हुए अदालत ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक उपनिरीक्षक की तरफ से दायर याचिका खारिज कर दी, जिन्हें 2011 में अनधिकृत अनुपस्थिति के आरोप में आरोपपत्र जारी होने के बाद सेवा से हटा दिया गया था। संवाद