ग्रेटर नोएडा। ताइवान और चीन से आयात किए जाने वाले सेमीकंडक्टर के देश में उत्पादन की तैयारी शुरू कर दी गई है। यमुना प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में 1000 एकड़ में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर विकसित किया जाएगा। यीडा सेक्टर-10 में बनाए जाने वाले क्लस्टर में 700 एकड़ में सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए प्लांट लगाए जाएंगे। जबकि 300 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जाएगा।
यीडा ने इसके लिए जमीन की खरीद भी शुरू कर दी है। जमीन खरीदने का काम पूरा होती ही योजना लांच कर दी जाएगी। अहम है कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में सेमीकंडक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। देश में आमतौर से सेमीकंडक्टर को ताइवान और चीन से मंगाकर असेंबल किया जाता है। इसका इस्तेमाल कार, मोबाइल और लैपटॉप में लगाया जाता है। सेमिकंडक्टर चिप मशीनरी को कंट्रोल करने के लिए लगाई जाती है। कोराना काल में आयात रुक जाने से सेमीकंडेक्टर की कमी हो गई थी। जिसका असर वाहन और मोबाइल उत्पादन पर दिखा था। बाजार में मांग होने के बावजूद कंपनियां क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं कर पा रही थीं।
पांच नए क्लस्टर बनेंगे, लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार
यमुना प्राधिकरण सेक्टर-10 व आसपास की करीब 200 एकड़ जमीन पर पांच औद्योगिक कलस्टर बनाने की तैयारी है। इससे उद्योगों को बढ़ावा मिल सकेगा और करीब डेढ़ लाख युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। इसमें लेदर पार्क, प्लास्टिक पार्क, हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट पार्क, इलेक्ट्रिकल पार्क, ट्रांसपोर्ट पार्क शामिल हैं। बोर्ड बैठक में हरी झंडी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई शुरू हो जाएगी। विशेष बात यह होगी कि एक क्लस्टर में एक ही तरह के उद्योग लग सकेंगे। यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में अभी तक अपैरल, एमएसएमई, हैंडीक्राफ्ट, टॉय सिटी पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क के रूप में पांच क्लस्टर बनाए जा चुके हैं और इनमें करीब 5 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।
एक लाख लोगों को मिलेगा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लोगों को रोजगार
प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर शुरू होे जोन से करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। फिल्म सिटी के बराबर जमीन पर बनाए जाने वाले इस क्लस्टर में छोटी-बड़ी कई इकाइयां लगाई जाएंगी।
छह माह पहले हो चुका है कैबिनेट में पास
छह माह पहले सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर के प्रस्ताव को कैबिनेट में पास किया जा चुका है। कोविड के बाद से प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए पास करके यमुना प्राधिकरण को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। माना जा रहा है कि कलस्टर योजना के लांच होने के बाद दो से तीन साल में उत्पादन शुरू हो सकता है।