- चाइल्ड पीजीआई की एंडोक्राइन क्लीनिक के अध्ययन में 240 बच्चे मिले पीड़ित
- 30 में बच्चों में मिली डायबिटीज, अधिकतर की उम्र 5 से 10 साल के बीच
नेहा शर्मा
नोएडा। हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ने के कारण बच्चे वक्त से पहले बड़े हो रहे हैं। चाइल्ड पीजीआई की एंडोक्राइन क्लीनिक में डॉक्टरों के अध्ययन में ऐसे 240 बच्चे सामने आए हैं। इनका यहां इलाज चल रहा है। हार्मोन्स गड़बड़ाने की वजह से इन बच्चों में उम्र के अनुसार कम या अधिक शारीकि विकास, थाइरॉइड, थकान, चिड़चिड़ापन जैसी तमाम दिक्कतें मिली हैं। इसमें से अधिकतर बच्चों की उम्र 5 से 10 साल के बीच में है। वहीं, डायबिटीज क्लिनिक में 30 बच्चों में डायबिटीज मिली है।
चाइल्ड पीजीआई में बच्चों के लिए डायबिटीज और एंडोक्राइन क्लीनिक शुरू की गई थी। इसके बाद अस्पताल की चाइल्ड फिजिशियन की ओपीडी में आने वाले बच्चों में हार्मोन्स और डायबिटीज के लक्षण दिखने पर इन्हें इस क्लीनिक में रेफर किया गया। यहां जांच के बाद डॉक्टर ने इनकी रिपोर्ट तैयार की है। चाइल्ड पीजीआई के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. भानु किरण भाखरी ने बताया कि क्लीनिक में फालोअप बच्चों के साथ 459 बच्चों का पंजीकरण हुआ। इसमें से 240 बच्चों में हार्मोन्स का संतुलन खराब मिला है। इसमें 40 प्रतिशत बच्चों को थाइरॉइड की बीमारी मिली है और 15 बच्चे ऐसे मिले हैं, जिनके अंदर वक्त से पहले प्यूबर्टी यानि बड़े होने के लक्षण दिख रहे हैं। इसमें आनुवांशिक और खानपान समेत कई कारण हैं। इसलिए डाॅक्टर सबसे पहले बच्चे के परिवार की हिस्ट्री पता करते हैं।
इसके अलावा डायबिटीज क्लीनिक में 168 पंजीकरण हुआ है। इसमें से 30 बच्चों को डायबिटीज मिली है। इसमें 28 बच्चों में टाइप वन डायबिटीज है। इनमें से अधिकतर स्कूल जाने वाले बच्चे हैं। इनको फालोअप के लिए भी बुलाया जा रहा है। अगर बच्चे का विकास उम्र के अनुसार नहीं हो रहा है या फिर बच्चे में बर्ताव सामान्य नहीं दिख रहा है तो अभिभावक उसे डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
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चाइल्ड पीजीआई में इस दिन चलती हैं ओपीडी
सोमवार को - डायबिटीज क्लीनिक
बुधवार को- एंडोक्राइन क्लीनिक
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बच्चों के खानपान का रखें ध्यान:
- बच्चों को मौसमी फल और सब्जियां खिलाएं।
- बच्चों को पैकेट बंद और प्रोसेस्ड फूड न खिलाएं। जितना हो सके घर में बनी चीजें खिलाएं।
- खेलकूद की गतिविधियों में शामिल करें।
- मोबाइल फोन से दूर रखें।