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Noida News: कैंसर की नकली दवाओं का कारोबार बढ़ा

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कैंसर की नकली दवाओं का कारोबार बढ़ा
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- खरीद बिक्री का रिकॉर्ड नहीं मिलने पर 20 लाख की कीमत के दस इंजेक्शन जब्त, जांच के लिए भेजे

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। दिल्ली-एनसीआर में कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ जारी है। कैंसर की नकली दवाओं पर अंकुश लगाने के लिए एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। जिला औषधि विभाग ने नोएडा के मेडिकल स्टोर से 20 लाख रुपये की कीमत के दस इंजेक्शन जब्त किए हैं। इन्हें जांच के लिए लखनऊ स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है।

मेडिकल स्टोर की जांच के दौरान बिलों में गड़बड़ी मिलने पर यह कार्रवाई की गई है। सीज की गई इंजेक्शन की दस वॉयल से संबंधित खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड नहीं मिलने पर विभाग ने कार्रवाई की है। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले अप्रैल में शहर के एक दवा विक्रेता के यहां से इंजेक्शन बरामद हुए थे, जिनकी जांच में इंजेक्शन नकली होने की पुष्टि हुई है। हालांकि, जिन दवाओं के नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं, उनकी जांच रिपोर्ट आने में अभी दो से तीन महीने का समय लग सकता है।
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दिल्ली-एनसीआर का बाजार नकली दवाओं को खपाने का हॉट स्पॉट बन गया है। पिछले कुछ माह में कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं, जिनका कनेक्शन नोएडा से जुड़ा मिला है। नवंबर 2022 में सोनीपत से नोएडा-गाजियाबाद में कैंसर की नकली दवाओं की सप्लाई का खुलासा हुआ था। इस साल मई 2023 में कैंसर के नकली इंजेक्शनों के सप्लायर को हरियाणा पुलिस ने नोएडा के सेक्टर-62 से गिरफ्तार किया था।



बढ़ता मेडिकल टूरिज्म भी एक वजह

भारत में कैंसर, स्पाइन, हृदय रोग, न्यूरो सर्जरी, लिवर व किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा विकसित देशों के मुकाबले तीन से चार गुना तक सस्ती मिल रही है। इसके अलावा इलाज के परिणाम बेहतर साबित हो रहे हैं। सस्ते इलाज की चाह में खाड़ी और अफ्रीकी देशों के मरीज अच्छी खासी तादाद में दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों में आ रहे हैं, जिसका फायदा नकली दवा माफिया उठा रहे हैं।



डेढ़ साल में 14 दवाओं के नमूने फेल

औषधि विभाग के अनुसार साल 2022 में 12 एंटीबायोटिक दवाइयों के नमूने फेल मिले थे, इस साल के आंकड़े जोड़े जाएं तो संख्या 14 बैठती है। चार दवाएं मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं। जिनमें एंटीबायोटिक टेबलेट मेरीक्लेव, एंटी वायरल टेबलेट फेरावीर आदि शामिल हैं। जबकि एंटीबायोटिक टेबलेट जिफी ओ और जिफी के नमूने फेल मिले हैं।



अब तक 431 स्थानों पर मार चुके हैं छापा

कोविड के दौरान नकली दवाइयों की आपूर्ति बढ़ने पर औषधि विभाग ने जांच की कार्रवाई तेज की है। अप्रैल 2021 से अब तक 431 मेडिकल स्टोर और दवा कंपनियों की जांच की जा चुकी है। इस साल अप्रैल से जुलाई के बीच ही 64 दवाओं के नमूने लिए जा चुके हैं। इनमें ज्यादातर एंटीबायोटिक दवाएं शामिल रहीं।
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क्या बरतें सावधानी

- अगर कोई कम कीमत पर दवाएं दिलाने की बात कहे तो सावधान हो जाएं। दवा या तो नकली होगी या इसे बनाने के फॉर्मूले में अंतर होगा।

- दवाओं को खरीदने के बाद उसे अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए। एक अच्छा डॉक्टर आसानी से पहचान कर सकता है।

- दवाइयां खरीदते समय उसकी पैकिंग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। पैकिंग में किसी तरह की कमी दिखे तो दवा खरीदने से बचें।

- भरोसेमंद मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदें और दवा लेने के बाद उसका बिल जरूर लें।



दवाओं की गुणवत्ता परखने के लिए लगातार जांच की कार्रवाई की जा रही है। एक मेडिकल स्टोर से कैंसर के दस इंजेक्शन की वॉयल सीज कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजी गई हैं। इनकी खरीद-बिक्री का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। - वैभव बब्बर, जिला औषधि निरीक्षक
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