फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Noida News: फ्लैट खरीदारों की कीमत पर बिल्डरों ने भरे अपने घर

विज्ञापन
विज्ञापन
फंड डायवर्जन से मुश्किल में खरीदार, सुपरटेक मामले में सीएमडी की गिरफ्तारी के बाद मामला और पेचिदा
विज्ञापन



2 लाख लोगों को अब भी आशियाने का इंतजार

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का न तो 20 हजार करोड़ का बकाया मिला, न ही दो लाख फ्लैट खरीदारों को सपने का आशियाना। सुपरटेक मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सुपरटेक के चेयरमैन की गिरफ्तारी के बाद जिले में फ्लैट खरीदारों का मामला और पेचीदा हो गया। खरीदारों की रजिस्ट्री के लिए प्राधिकरण एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं, लेकिन बिल्डरों के बकाया चुकाए बिना रजिस्ट्री संभव नहीं दिख रही है।
जिले में वर्ष 2010 के बाद रियल एस्टेट का कारोबार तेजी से आगे बढ़ा। प्राधिकरणों की ओर से जमीन आवंटन के सरलीकरण ने सबको बिल्डर बना दिया, यानी जो भी थोड़े बहुत कागजात लेकर आया, उससे 10 प्रतिशत की आवंटन राशि लेकर जमीन दे दी। रेवड़ी की तरह जमीन बांटी गई, लेकिन अब यही जमीन प्राधिकरणों और बिल्डरों के गले की हड्डी बन गई है।
विज्ञापन

जमीन का आवंटन कराने के बाद बिल्डरों ने सबसे पहला काम खरीदारों की बुकिंग का किया। खाली जमीन में बड़ा सा होर्डिंग लगाकर सपना दिखाया गया। लोगों ने भी इसका लाभ उठाने के लिए अपनी जीवनभर की कमाई लगा दी। बिल्डरों ने पैसे तो लिए, लेकिन उन पैसों को उस परियोजना में न लगाकर किसी और परियोजना या जमीन में लगा दिए, यानी उन्होंने फंड का डायवर्जन कर दिया। आम्रपाली मामले की फॉरेंसिक ऑडिट में फंड डायवर्जन का खुलासा पहले ही हो चुका है। ऐसे में निर्माण का काम पूरा नहीं हो पाया।


खरीदारों ने दबाव डाला तो एनसीएलटी का रुख करने लगे बिल्डर
जब फ्लैट खरीदारों ने फ्लैट पर कब्जे और रजिस्ट्री का दबाव डाला तो बिल्डरों ने पहले शासन, प्रशासन आदि का सब्जबाग दिखाया। उन्होंने एक फर्जी डेडलाइन भी दी, ताकि लोगों को गुमराह किया जा सके। पैसे नहीं होने की बात सबके सामने रखी, लेकिन अधूरे फ्लैटों का निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया। बाद में जब पानी सिर से ऊपर बहने लगा तो नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के सहारे दिवालिया प्रक्रिया में चले गए, यानी उनके पास अब इतना पैसा नहीं है कि वह अधूरे निर्माण को पूरा कराएं और लोगों की देनदारी का वहन कर सकें।
विज्ञापन



हरियाणा की तर्ज पर एकमुश्त समाधान योजना की मांग
हालांकि बिल्डरों ने इतने मुश्किल हालात में मामले को पहुंचाने के बाद भी अपनी मांगें रखनी नहीं छोड़ीं। उन्होंने प्रदेश सरकार और प्राधिकरणों के सामने हरियाणा की तर्ज पर एकमुश्त समाधान योजना की मांग रखी। इसमें ब्याज में भारी छूट का लाभ लेते हुए एक बार में पैसे जमा कराने का नियम है, लेकिन प्राधिकरण की ओर से इस मामले में अभी तक किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में प्राधिकरण के हक में फैसला देने के बाद बकाया वसूली के प्रयास शुरू हुए हैं, लेकिन बिल्डरों ने अब तक केवल 375 करोड़ रुपये बकाये की वापसी की है।


नोएडा में बिल्डर परियोजनाओं का आंकड़ा
बिल्डर प्रोजेक्टों की संख्या-115
पूरे हो चुके प्रोजेक्टों की संख्या-47
चल रहे प्रोजेक्टों की संख्या-42
स्वीकृत परियोजनाएं (अधिभोग के लिए आवेदन प्राप्त नहीं)-8
आम्रपाली प्रोजेक्ट-14715 फ्लैट
यूनिटेक प्रोजेक्ट-5
जेपी इंफ्राटेक प्रोजेक्ट-1
कुल स्वीकृत फ्लैट की संख्या-1,66,878 फ्लैट
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें