ग्रेटर नोएडा। बिल्डरों का एनसीआर से मोह भंग हो रहा है। नए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए वह एनसीआर से बाहर के जिलों की तरफ रुख कर रहे हैं। प्रदेश में इस साल करीब 125 नए प्रोजेक्ट लांच हो रहे हैं और इनमें 66 प्रतिशत प्रोजेक्ट एनसीआर से बाहर बनेंगे। बिल्डरों के बाहरी जिलों में जाने के कारण एनसीआर से करीब 8 हजार करोड़ रुपये का निवेश नहीं होगा है। इसके अलावा खरीदारों को अब यहां कम विकल्प भी मिलेंगे।
उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूूपी रेरा) में इस वर्ष जनवरी से जून तक विभिन्न बिल्डरों ने 125 प्रोजेक्ट का पंजीकरण कराने का आवेदन किया है। बिल्डरों के एनसीआर से बाहर जाने का फायदा अन्य जिलों को होगा। लेकिन लेकिन गौतमबुद्घ नगर समेत एनसीआर को खासा नुकसान होगा। अनुमान है कि सभी 125 प्रोजेक्ट में करीब 12500 करोड़ का निवेश होगा। इसमें से करीब 8000 करोड़ का निवेश एनसीआर के बाहर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में होगा। प्रोजेक्ट शुरू होने से वहां लोगों को रोजगार और मजदूरों को काम मिलेगा। यूपी रेरा के अफसरों ने बताया कि इन सभी प्रोजेक्ट में करीब 20 हजार आवासीय और व्यावसायिक यूनिट होंगी।
रियल एस्टेट सेक्टर में लौट रही रौनक
कोराना काल के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में फिर से रौनक लौट रही है। पिछले वर्ष की पहली छमाही में यूपी रेरा को 100 प्रोजेक्टों के पंजीकरण के आवेदन मिले थे। जो इस साल बढ़कर 125 हो गए हैं। करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी को खासा अहम माना जा रहा है। वहीं, बिल्डर अभी भी आवासीय प्रोजेक्टों पर भरोसा कर रहे हैं। इस साल शुरू होने वाले 125 प्रोजेक्टों में से 75 प्रतिशत आवासीय हैं। बाकी 25 प्रतिशत प्रोजेक्ट व्यावसायिक और मिक्स लैंड यूज के हैं। अहम है कि यूपी रेरा में 3200 से अधिक प्रोजेक्ट पंजीकृत हैं।
विकास से दूसरे जिलों में जा रहे हैं प्रोजेक्ट
प्रदेश के सभी जिलों में विकास की बड़ी-बड़ी योजनाएं आ रही हैं। एक्सप्रेसवे बन रहे हैं। इसका असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिख रहा है। बिल्डर नए जिलों की तरफ रुख कर रहे हैं। यूपी रेरा को एनसीआर से बाहर लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, बरेली, प्रयागराज, आगरा, मथुरा, अमरोहा, शाहजहांपुर, गोंडा, बहराइच, सुल्तानपुर, फिरोजाबाद, ललितपुर से प्रोजेक्ट पंजीकरण के आवेदन मिले हैं। एनसीआर के प्रोजेक्ट गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और मेरठ के हैं।