केंद्र और राज्य के अधिकारियों की कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी नजर
-कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगी-फिर राज्य सरकार फैसला लेगी कि बिल्डर खरीदार मामले में क्या एक्शन लेना चाहिए
-नोएडा-ग्रेटर नोएडा की परियोजनाओं को उबारने के लिए बनाई गई है कमेटी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में गठित केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की कमेटी बिल्डर-खरीदार मामले में अपनी रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं। उसके आधार पर राज्य सरकार यह फैसला लेगी कि इस मामले में अब आगे क्या करना चाहिए। केंद्र की कमेटी ने कई बैठकों के बाद अब रिपोर्ट तैयार कर लिया है।
दरअसल, बिल्डर खरीदार मामले के तूल पकड़ने के बाद आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से एक कमेटी का गठन किया गया। कमेटी में केंद्र और राज्य के अधिकारियों को शामिल किया गया। इसका मकसद नोएडा-ग्रेटर नोएडा की बिल्डर परियोजनाओं की जांच करना और उनको पूरा करने के लिए तरीके खोजना रहा। इस कमेटी में नोएडा प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी भी हैं।
कमेटी ने इस मामले में कई बैठकें की और नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बिल्डर परियोजनाओं की नब्ज टटोली। अब इस कमेटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट देनी है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार के अधिकारी इस मसले पर चर्चा करेंगे। इसमें यह तय होगा कि उक्त मामले के समाधान के लिए क्या कार्ययोजना बनाई जाए।
को-डेवलपर पॉलिसी बनाने पर भी होगा फैसला
नोएडा प्राधिकरण की ओर से बिल्डर-खरीदार मामले को सुलझाने के लिए को-डेवलपर पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर शासन को भेजा गया है। इस पॉलिसी के तहत उन बिल्डरों की संपत्ति का पता लगाकर खाली जमीनों पर नए निर्माण और अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए कवायद की जाएगी। इसमें यह भी तय होगा कि जो भी नया बिल्डर होगा उसको उस परियोजना से एकमुश्त फायदा भी हो ताकि वह नई परियोजना में हाथ लगा सके।
मुख्यमंत्री का भी है प्राधिकरणों पर दबाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों नोएडा-ग्रेटर नोएडा के दौरे में प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने प्राधिकरण के अधिकारियों से साफ-साफ कहा कि वह भारत सरकार की कमेटी के साथ बैठें और रिपोर्ट को अंतिम रुप देने में मदद कराएं। साथ ही आम्रपाली के मामले में कोर्ट रिसीवर के साथ बातचीत कर अपने बकाये के बारे में स्थिति स्पष्ट करें। यही नहीं अन्य मामलों में भी प्राधिकरण के अधिकारियों को सक्रिय होने को कहा गया ताकि फ्लैट खरीदारों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।
राहुल भटनागर की अध्यक्षता में भी बनी थी कमेटी
यूपी में योगी सरकार के आने के बाद राहुल भटनागर की अध्यक्षता में भी एक कमेटी बनी थी, जिसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के तीनों सीईओ को कमेटी में शामिल किया गया था। इनकी रिपोर्ट मिलने के बाद योगी आदित्यनाथ ने मंत्री सुरेश खन्ना के नेतृत्व में मंत्री मंडल की एक समिति बनाई थी। इन्होंने बिल्डरों के प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी और रिशिड्यूलमेंट आदि मामले में संस्तुति दी थी। हालांकि यह ज्यादा प्रभावी नहीं रही।
करीब 200 प्रोजेक्टाें के दो लाख खरीदारों का है मामला
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के करीब 200 प्रोजेक्टों के दो लाख फ्लैट खरीदार इस मामले में फंसे हुए हैं। उनको फ्लैटों पर कब्जा नहीं मिला है। साथ ही उनकी रजिस्ट्री भी नहीं हुई है। कई खरीदार ऐसे हैं जिनको कब्जा तो मिला है लेकिन रजिस्ट्री नहीं हुई है। इसमें नोएडा के फ्लैट खरीदार अधिक हैं।