बीएसए मैडम कभी हमारा मिड डे मील आप भी चखिए
- प्लेट गायब, हाथों में दिया जा रहा मिड डे मील, सब्जी के नाम पर सिर्फ नमक हल्दी का पानी
पिछले दिनों गाजियाबाद के स्कूल में मिड डे मील खाने से कई बच्चे बीमार हो गए थे। दूध पीने के बाद बच्चों के पेट व सिर में दर्द और उल्टी की शिकायत होने लगी थी। इसके बाद अमर उजाला संवाददाता नेहा शर्मा ने स्कूलों में जाकर मिड डे मील में मिलने वाले खाने की पड़ताल की।
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। बीएसए मैडम कभी हमारा मिड डे मील आप भी चख लीजिए। पता चल जाएगा, खाने की गुणवत्ता कैसी है। सब्जी नहीं सिर्फ नमक हल्दी का पानी है। इसके साथ कैसे रोटी खाई जाए। मजबूरी में हम तो घर से ही खाना लेकर आने लगे हैं। मिड डे मील के लिए घर से बर्तन नहीं लाते तो हाथ में रोटी और उस पर सब्जी रखकर दे दी जाती है। यह दर्द जिले के प्राइमरी व जूनियर स्कूलों के छात्रों ने बयां किया।
घर से लेकर आ रहे टिफिन बॉक्स
सर्फाबाद के प्राइमरी स्कूल में अधिकतर छात्र घर से लंच लेकर आ रहे हैं। जब स्कूल की प्रधानाध्यापिका मीना कुमारी से इसके बारे में पूछा गया तो पहले उन्होंने स्कूल के अंदर आने के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी का अनुमति पत्र मांगा। लेकिन बाद में उन्होंने कहा कुछ बच्चों को घर का खाना खाने का मन करता है, इसलिए वह घर से खाना लेकर आ रहे हैं। स्कूल के पास सिर्फ 100 प्लेट हैं और बच्चे 429 हैं। ऐसे में सभी बच्चों को प्लेट में मिड डे मील दे पाना संभव नहीं है। जब एक बच्चे से पूछा गया कि खाने में केला मिला? तो उसने कहा केला तो कभी नहीं मिलता।
रखवाली के लिए गेट पर खड़ा रहता है एक बच्चास्कूल में कोई प्रवेश नहीं कर सके इसके लिए एक बच्चे को स्कूल के गेट पर खड़ा कर दिया गया। बच्चे से पूछा गया तो उसने बताया कि रोजाना लंच के दौरान उसको गेट पर खड़ा होना पड़ता है।
बच्चे ही बांट रहे खाना, धूप और गंदगी में खा रहे
गढ़ी चौखड़ी के प्राथमिक स्कूल में बच्चे मिड डे मील बांट रहे थे। बच्चे धूप और गंदगी में बैठकर खाना खा रहे थे। अगर किसी बच्चे के पास लंच बॉक्स नहीं था तो उसको हाथ में रोटी दी जा रही थी। शिक्षकों ने बच्चों को ही मिड डे मील बांटने की जिम्मेदारी दी थी। यहां पर रोटी को लेकर दो बच्चों की लड़ाई तक हो गई। बच्चे शौचालय से कुछ दूरी पर बैठकर ही मिड डे मील खा रहे थे। बदबू की वजह से यहां बैठना तक मुश्किल हो रहा था। जब प्रधानाध्यापिका सुनीता रानी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि स्कूल में 340 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन बैठने की व्यवस्था नहीं है।