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Noida News: जिला अस्पताल में शुरू हुई ब्रोंकोस्कोपी की सुविधा

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10 अगस्त को प्रकाशित खबर की पीडीएफ और मरीज के उपचार की फोटो भी है।
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इंपैक्ट :

जिला अस्पताल में शुरू हुई ब्रोंकोस्कोपी की सुविधा

- तीन साल से धूल खा रही थी मशीन, अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आया अस्पताल प्रशासन

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। जिला अस्पताल की इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में सोमवार से ब्रोंकोस्कोपी की सुविधा शुरू कर दी गई। तीन साल से अस्पताल के स्टोर रूम में ब्रोंकोस्कोपी मशीन धूल खा रही थी। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद यह सुविधा शुरू कर दी गई। सोमवार को आईसीयू में भर्ती गंभीर रोगी की इस मशीन के जरिये जांच और उपचार कर जिंदगी बचाई गई।

अमर उजाला ने 10 अगस्त के अंक में ‘आईसीयू के बंद कमरे में धूल खा रही ब्रोंकोस्कोपी मशीन’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और इस मशीन से जांच और उपचार की सुविधा शुरू कराई। अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेनू अग्रवाल ने बताया कि अब नियमित रूप यह सुविधा जरूरतमंद मरीजों को दी जाएगी। अस्पताल के डॉ. शोएब ने बताया कि जहरीला पदार्थ खाने की शिकायत के बाद 24 वर्षीय मरीज 10 अगस्त को इमरजेंसी में लाया गया था। उसे तत्काल आईसीयू में शिफ्ट किया गया, उसके ऑक्सीजन का स्तर 30-40 तक था। ऐसे में उसे लगातार वेंटिलेटर पर रखा गया। उसके फेफड़ों की नली में म्यूकश प्लस (बलगम की गांठ) बनने से सांस लेने में कठिनाई बढ़ती जा रही थी। सोमवार सुबह मरीज की हालत बिगड़ गई। तुरंत मरीज को आईसीयू-3 में ले जाया गया और उसकी वीडियो ब्रोंकोस्कोपी कर बलगम की गांठ का पता लगाकर उसे निकाला गया। अब मरीज की हालत स्थिर है।
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कोविड में मिली मशीन खा रही थी धूल

तीन साल पहले टाटा कंपनी की तरफ से यह मशीन उपलब्ध कराई गई थी, जिसका कोरोना की दूसरी लहर के दौरान काफी उपयोग किया गया था। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान संक्रमण की मार फेफड़ों तक होने के कारण सांसों पर संकट आ गया था। कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी, उसी दौरान इस मशीन का इस्तेमाल मरीजों के फेफड़ों की जांच के लिए किया गया था। संक्रमण का खतरा टलते ही मशीन को स्टोर रूम में रखवा दिया गया।
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क्या है ब्रोंकोस्कोपी जांच

ब्रोंकोस्कोपी के जरिये डॉक्टर मरीज के श्वसन मार्ग और फेफड़ों की जांच करते हैं। लगातार संक्रमण या खांसी के मरीजों या फिर एक्सरे में असाधारण सा दिखाई देने पर विशेषज्ञ ब्रोंकोस्कोपी जांच कराने की सलाह देते हैं। इसका इस्तेमाल बलगम, गले और फेफड़ों से ऊत्तकों का नमूना लेने के लिए किया जाता है। निमोनिया, टीबी और फेफड़ों के कैंसर के अलावा अन्य मरीजों के उपचार के दौरान भी ब्रोंकोस्कोपी जांच कराई जाती है। जिसमें एक पतली ट्यूब जिसे ब्रोंकोस्कोप कहा जाता है, उसे मुंह या नाक के रास्ते डाला जाता है। यह उपचार में भी कारगर होती है।
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