‘गारंटीड रिटर्न स्कीम’ से 250 करोड़ रुपये का चूना
बिल्डरों के खिलाफ चल रही आयकर विभाग की जांच में ''गारंटीड रिटर्न स्कीम'' के नाम पर सरकारी खजाने को करीब 250 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का मामला आया है। इस योजना में निवेशकों को बेची गई संपत्तियों की कीमत ही बिल्डर्स ने अपने दस्तावेजों में कम दिखाई। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि बिल्डरों ने जो संपत्ति 100 रुपये में बेची। उसे गारंटीड रिटर्न की किश्त घटाते हुए अपनी एकाउंट बुक में दर्ज किया। इससे टैक्स की देनदारी भी उनकी कम हो गई। इससे सीधे तौर पर सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ। आमतौर पर बिल्डर कंपनियां गारंटीड रिटर्न स्कीम में 12 फीसदी से लेकर 24 फीसदी तक रिटर्न देने का वायदा अपने ऑफर में करती हैं। इससे निवेशक भी संपत्ति में निवेश करने के लिए आकर्षित होता है।
कैश में संपत्ति खरीदने वालों का भी मिला ब्यौरा
आयकर विभाग के सर्च ऑपरेशन में बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां भी मिली हैं जिनको कैश में बेचा गया। ऐसी संपत्तियां कोडनेम से बेचने के भी साक्ष्य विभाग को जांच में मिले हैं। इन संपत्तियों को किसने खरीदा? इसके लिए बिल्डर कंपनियों के अधिकारियों से भी पूछताछ की गई है। कुछ नाम आयकर विभाग के सामने आए भी हैं। इनके आय के स्रोतों की जांच की जा रही है।
यूफ्लेक्स के बाद दूसरा बड़ा सर्च ऑपरेशन
आयकर विभाग के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक नोएडा में पैकिंग सर्विस प्रोवाइडर कंपनी यूफ्लेक्स के बाद यह दूसरी सबसे बड़ा सर्च आपरेशन है। यूफ्लेक्स के खिलाफ भी छह दिन तक जांच चली थी। इसके बाद करीब 1000 करोड़ रुपये की आयकर से जुड़ी अनियमितताएं मिली थीं। बिल्डरों के खिलाफ जांच का आंकड़ा अभी बढ़ने की भी उम्मीद है।