गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों का बड़ा खेल, पढ़ाई कहीं और तो पंजीकरण कहीं और
- शिक्षा विभाग की ओर से छात्रों की संख्या क्रॉस चेक नहीं होने की वजह से कई छात्रों का साल हुआ बर्बाद
- पिछले दिनों शिक्षा विभाग को 22 स्कूल बिना मान्यता के चलते मिले थे
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। एजुकेशन हब में गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों का बड़ा खेल चल रहा है। शिक्षा विभाग की ओर से छात्रों की संख्या क्रॉस चेक नहीं किए जाने से कई स्कूल पढ़ाई कहीं और से करवा रहे हैं तथा परीक्षा कहीं और से दिलवाने का काम कर रहे हैं। पिछले एक महीने में दो स्कूल ऐसा करते हुए पकड़े गए हैं। इससे कई छात्रों का साल बर्बाद हो गया है। अब विभाग जांच समिति बनाकर पल्ला झाड़ रहा है। अप्रैल से नया सत्र शुरू होने जा रहा है, ऐसे में बच्चे का दाखिला कराने से पहले स्कूल की मान्यता जरूर जांच लें।
गल्ली मोहल्ले में बड़ी संख्या में स्कूल चल रहे हैं, जिनके पास 5वीं तक की मान्यता है। लेकिन इन्होंने मान्यता प्राप्त किसी दूसरे स्कूल से सांठगाठ कर ली है। ये छात्रों को पढ़ाई तो खुद के स्कूल में कराते हैं, लेकिन बोर्ड में पंजीकरण किसी अन्य मान्यता प्राप्त स्कूल में करवा देते हैं। अधिकतर नोएडा के स्कूल गाजियाबाद के स्कूल में पंजीकरण करा रहे हैं। इसके बदले में मान्यता प्राप्त स्कूल को प्रति छात्र के हिसाब से फीस देते हैं। शिक्षा विभाग की ओर से कभी स्कूल में पंजीकृत और पढ़ रहे छात्रों का क्रॉस चेक नहीं किया जाता है। इस वजह से धड़ल्ले से स्कूलों में फर्जीवाड़ा चल रहा है। वहीं, मान्यता प्राप्त स्कूल केवल रजिस्टर में बच्चे का नाम लिखकर अन्य खर्चों से बच जाते हैं। शिक्षा विभाग की ओर से पिछले दिनों 22 से ज्यादा स्कूल बिना मान्यता के चलते मिले थे।
प्रेक्टिकल में बेहतर अंक का झांसा देकर करते हैं आकर्षित
दाखिले के दौरान स्कूल में अभिभावक और छात्रों से बोला जाता हैं कि प्रेक्टिकल में अच्छे अंक मिल जाएंगे। इससे छात्र का बोर्ड रिजल्ट बेहतर हो जाएगा। इस झांसे में आकर अभिभावक स्कूल में दाखिला करा देते हैं। बाद में जब पता चलता है तो छात्र के पास दूसरे स्कूल में दाखिला कराने का विकल्प ही नहीं बचता है। गैर मान्यता प्राप्त स्कूल के सर्टिफिकेट पर मान्यता प्राप्त दाखिला नहीं देता है। इन स्कूलों के विज्ञापन गली मोहल्ले में लगे हुए हैं। ऐसे में अभिभावकों को लगता ही नहीं की स्कूल गैर मान्यता प्राप्त हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. धर्मवीर सिंह ने बताया कि औचक निरीक्षण के जरिए स्कूल के मान्यता की जांच की जा रही है। अगर किसी स्कूल के पास पांचवीं तक मान्यता होगी और बोर्ड के छात्रों को पढ़ाते हुए मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।