डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में लग चुके हैं एक साल में चार वाल्व
चारों मरीजों की स्थिति बेहतर, हार्ट कर रहा बेहतर तरीके से पंप
डॉक्टरों की मांग, वाल्व बनाने पर हो शोध, दाम में आ सकती है गिरावट
- 65 साल से अधिक व गंभीर मरीजों के लिए मददगार है टीएवीआई
राकेश शर्मा
नई दिल्ली। दिल के इलाज में ट्रांस कैथेटर महा धमनी वाल्व प्रतिस्थापन (टीएवीआर) तकनीक से लगाए जा रहे स्वदेशी वाल्व के परिणाम बेहतर आ रहे हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में पिछले एक साल में ऐसे चार मरीजों में स्वदेशी वाल्व को लगाया जा चुका है। चारों मरीजों की हालत बेहतर है और दिल भी अच्छी तरह से पंप कर रहा है।
दरअसल बुजुर्ग और गंभीर रूप से दिल के मरीजों की ओपन हार्ट सर्जरी नहीं की जा सकती। ऐसे मरीजों के उपचार के लिए टीएवीआर विकल्प को चुना जाता है। इस विधि में रोगग्रस्त महा धमनी वाल्व के भीतर एक नया वाल्व लगाने के लिए एक कैथेटर का इस्तेमाल होता है। डॉक्टर पैर की बड़ी नस के माध्यम से कैथटर को हार्ट तक लेकर जाते हैं और वाल्व में फिक्स कर देते हैं। कुछ साल पहले तक देश में विदेशी कंपनी के ही वाल्व उपलब्ध थे जिनकी कीमत 22 लाख रुपये तक है, लेकिन बीते कुछ साल से स्वदेशी कंपनी भी वाल्व उपलब्ध करवा रही है। इनकी कीमत 12 से 13 लाख रुपये तक पड़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि भारत जैसे देश में यह दाम भी काफी ज्यादा है। इस दिशा में और शोध होने चाहिए जिससे इनके दाम और नीचे आ सकते हैं।
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10 गंभीर मरीजों में से दो को होती है जरूरत
इस बारे में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के कॉडियोलॉली विभाग में प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार ने बताया कि अस्पताल में वाल्व सिकुड़ने व अन्य दिक्कत के साथ आने वाले गंभीर 10 मरीजों में से दो को वाल्व बदलवाने की जरूरत होती है। यदि मरीज की उम्र 65 साल से अधिक है या ओपन हार्ट सर्जरी करना संभव नहीं तो टीएवीआर से वाल्व को लगाया जाता है। यह काफी सुरक्षित माध्यम है। अस्पताल में इस विधि से चार मरीजों का इलाज किया जा चुका है। सभी में स्वदेशी वाल्व को लगाया गया और मरीजों का दिल बेहतर तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अभी कुछ कंपनी वाल्व बना रही हैं। यदि इनमें और कंपनी शामिल होती है। इस दिशा में शोध होता है तो इसके दाम को घटाया जा सकता है। अभी भी दाम ज्यादा होने के कारण इसे नहीं लगवा पाते। यदि दाम सस्ते होते हैं तो भारत में काफी मरीजों को फायदा हो सकता है। देश में ऐसे काफी मरीज हैं। लक्षण आने के बाद यदि जल्द सर्जरी नहीं होती तो ऐसे मरीज एक से दो साल में दम तोड़ देते हैं।
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टीएवीआर से फायदे
- कम होता है खून का रिसाव
- सर्जरी के दूसरी दिन मिल जाती है छुट्टी
- मरीज को नहीं होती सांस लेने में दिक्कत
- नहीं रहना पड़ता फिजियोथेरेपी के सहारे
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किन्हें होती है जरूरत
- वाल्व में कैलशियम ज्यादा जमने के कारण
- 65 साल से बुजुर्ग
- दिल के गंभीर रोगी