ग्रेटर नोएडा। थाना सेक्टर-113 में दर्ज धोखाधड़ी के एक मामले में सत्र अदालत ने चार आरोपियों कल्पना सचान, दिव्या गौतम, साहिल राना और रविन्द्र कुमार वनवारिया की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने शिकायतकर्ता की जानकारी व सहमति के बिना उसके नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर एओडब्ल्यूए नामक एसोसिएशन का फर्जी गठन व पंजीकरण कराया। पंजीकरण के लिए जाली दस्तावेज का इस्तेमाल किया। साथ ही शिकायतकर्ता के परिसर को बिना अनुमति एसोसिएशन का कार्यालय दर्शाया। कई वास्तविक आवंटियों की सहमति के बिना उनके नाम सदस्यता सूची में जोड़े गए और एक मृत व्यक्ति के हस्ताक्षर के दुरुपयोग का भी कथित आरोप है। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उन्हें पूर्व वैमनस्य के चलते झूठा फंसाया गया है। प्राथमिकी चार महीने की देरी से दर्ज कराई गई और विवाद मूलतः सिविल प्रकृति का है। वहीं अभियोजन ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ गंभीर व गैर-जमानती अपराधों के पर्याप्त प्रथम दृष्टया आरोप मौजूद हैं। अदालत ने पाया कि मामला केवल सिविल विवाद तक सीमित नहीं, बल्कि धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ा है। ब्यूरो