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Noida News: कैग की रिपोर्ट के बाद अब आरोपी अधिकारियों पर गाज गिराने की तैयारी

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-पीएसी में सुनवाई शुरू, आरोपियों पर अंतिम तौर पर कार्रवाई के होंगे आदेश
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-शासन के आदेश के बाद प्राधिकरण के अधिकारी कर रहे सहयोग

माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के कामकाज पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के 2021 की रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों पर गाज गिराने की तैयारी शुरू हो गई है। कैग की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए नोएडा प्राधिकरण से अपना मत प्रस्तुत करने को कहा है। प्राधिकरण की ओर से रिपोर्ट देने के बाद अब शासन स्तर पर पब्लिक अकाउंट कमेटी (पीएसी) इस मामले में सुनवाई कर रही है। पीएसी की बैठक के बाद अंतिम तौर पर यह तय होगा कि दोषी अधिकारियों के नामों में से किस पर गाज गिरनी है। कौन इससे बचकर बाहर निकल पाएगा। सुनवाई के दौरान प्राधिकरण के उच्चाधिकारियों को भी मौजूद रहने को कहा गया है।
मंगलवार को लखनऊ में हुई पहली बैठक में कैग के स्पोर्ट्स सिटी की आपत्तियों पर सुनवाई शुरू हुई। इसमें पीएसी की कमेटी की ओर से कई सवाल किए गए। प्राधिकरण के अधिकारियों की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब दिए गए। हालांकि पहले दिन सुनवाई के लिए ज्यादा समय नहीं दिया गया। अब जून में इसकी सुनवाई फिर से शुरू होगी। लेकिन पीएसी की ओर से स्पोर्ट्स सिटी को लेकर व्यापक जानकारी मांगी गई। अब प्राधिकरण की ओर से सारी जानकारी अगली तिथि को मुहैया कराई जाएगी।
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इन बिंदुओं पर हो रही सुनवाई, दोषियों को किया जाएगा चिह्नित
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ग्रुप हाउसिंग के लिए आवंटित भूखंड की नीति पर सवाल
कैग ने ग्रुप हाउसिंग के किए गए भूखंड आवंटन की नीतियों पर सवाल उठाए थे। कैग का कहना है कि ऐसे प्लॉट केवल 10 प्रतिशत राशि लेकर आवंटित कर दिए गए। इनमें से अधिकांश भूखंडों पर निर्माण कार्य पूरे नहीं किए गए। यही नहीं प्राधिकरण की मूलधन राशि तक वापस नहीं आ पाई। ब्याज के हजारों करोड़ रुपये अब तक बिल्डरों के पास हैं। इस पर प्राधिकरण ने लापरवाही बरती।

प्लॉट लेने में अनियमितता का आरोप
कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रुप हाउसिंग के प्लॉट आवंटन के 12 मामलों में प्राधिकरण के रेट से केवल दो प्रतिशत तक ऊपर रखा गया। इसके अलावा 42 मामलों में केवल दो पार्टियां सामने आईं। यहां यह भी सामने आया कि इनमें से अधिकांश एक ही समूह के हैं। यानी कहीं न कहीं इसमें प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत रही होगी।

तकनीकी पात्रता के मापदंड पर खरे नहीं उतरना
कुछ मामलों में तकनीकी पात्रता के मापदंड पर ध्यान नहीं दिया गया, जबकि ऐसे मामलों में आवंटन के लिए किए गए आवेदन को सिरे से खारिज कर देना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह लापरवाही जानबूझकर की गई या फिर अनजाने में हई इसकी जांच के बाद आरोप तय होगा।

केवल जमीन देकर कर ली गई छुट्टी
प्राधिकरण की ओर से आवंटी को केवल जमीन देकर छुट्टी कर ली गई। उनकी ओर से इस मामले में पैसे की वापसी के लिए किसी तरह की योजना पर कोई काम नहीं किया गया। इसमें ऐसी योजना बनानी चाहिए थी कि जमीन के किस्त के साथ बिल्डर के परियोजना के काम को पूरा करने की अवधि पहले से तय होती। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
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स्पोर्ट्स सिटी के मामले में खेल सुविधाएं विकसित नहीं करना
कैग ने अपनी रिपोर्ट में प्राधिकरण के अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि प्राधिकरण की नाक के नीचे जमीन को टुकड़ों में बांटकर बेच दिया गया। यही नहीं वहां बिल्डरों ने घर बना दिया। लेकिन खेल सुविधाएं विकसित नहीं की, जबकि सबसे पहले खेल सुविधा विकसित करनी थी।
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