फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दस साल बाद जेपी ग्रींस कैलिप्सो के 148 खरीदारों को मिलेगा घर

विज्ञापन
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा। करीब दस साल बाद नोएडा सेक्टर-128 स्थित जेपी ग्रींस कैलिप्सो कोर्ट फेज टू प्रोजेक्ट के 148 खरीदारों का सपना पूरा होने जा रहा है। जल्द ही घर का कब्जा मिल जाएगा। देश में यह पहला प्रोजेक्ट है जिसे यूपी रेरा ने पूरा करवाया है। इससे खरीदार खुश हैं तो यूपी रेरा के चेयरमैन ने भी बड़ी उपलब्धि करार दिया है।
विज्ञापन

प्रोजेक्ट के दो टावर सात और आठ के खरीदार निर्माण न होने से परेशान थे, लेकिन यूपी रेरा ने मध्यस्थता करते हुए दूसरी कंपनी को प्रोजेक्ट पूरा करने का काम सौंपा था। काम पूरा होने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने एक अगस्त को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) भी जारी कर दिया। जल्द ही 148 खरीदारों को कब्जा देने की प्रक्रिया शुरू होगी। वहीं, टावर 11 व 12 में भी तेजी से निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए भी प्राधिकरण ओसी देने की तैयारी कर रहा है। यहां 274 लोगों को आशियाना मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में लोगों ने वर्ष 2010-11 में बुकिंग कराई थी।
क्या था प्रकरण
बिल्डर ने वर्ष 2017 में आठ टावरों को यूपी रेरा में पंजीकृत कराया था। पंजीकरण तिथि समाप्त होने तक केवल चार का निर्माण कराया जा सका। इससे बाकी टावर का निर्माण कार्य रुक गया। पीड़ित यूपी रेरा के समक्ष गए तो वहां से 29 जुलाई, 2020 को रेरा ने टावर 7, 8, 11 व 12 के फ्लैट दूसरी कंपनी से पूरे कराने के आदेश दिए थे।
विज्ञापन

अब जेपी इंफ्राटेक के प्रोजेक्ट में देरी पर लगेगा समय विस्तार शुल्क
नोएडा। अब जेपी इंफ्राटेक के प्रोजेक्ट पूरा होने में देरी पर प्राधिकरण समय विस्तार शुल्क वसूलेगा। प्राधिकरण 11 अगस्त की प्रस्तावित बोर्ड बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव रखेगा। अगर इस पर मुहर लगेगी तो जेपी ग्रुप के अलावा दूसरे बिल्डरों और 32 हजार खरीदारों पर असर पड़ेगा।
जेपी बिल्डर को नोएडा सहित कई स्थानों पर 2500 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। इसमें नोएडा में सेक्टर-128, 129, 133, 134, 135 और 151 में 500 हेक्टेयर जमीन मिली थी। यह जमीन एक्सप्रेसवे के विकास और अन्य कारणों से आवंटित की गई थी। इसकी लीज डीड यमुना प्राधिकरण में हुई, लेकिन नक्शा प्राधिकरण में पास किया गया था। शुरुआती दौर में जेपी को मामले में निर्माण कार्य पूरे करने के लिए कोई समयसीमा नहीं दी गई। नियम के मुताबिक आवासीय के लिए दो वर्ष व ग्रुप हाउसिंग के लिए पांच से सात वर्ष तक की समयावधि मिलती है। इसके बाद भी अगर निर्माण कार्य पूरे नहीं होते हैं तो बिल्डर को प्राधिकरण से समय विस्तार लेना पड़ता है। यह एक वर्ष के लिए आवंटित जमीन की कुल कीमत का चार प्रतिशत, दूसरे वर्ष में पांच प्रतिशत, तीसरे वर्ष में छह प्रतिशत सहित 25 प्रतिशत तक की राशि देनी होती है।
प्राधिकरण के नियोजन विभाग ने जब दस्तावेज की जांच की तो पता चला कि जेपी ग्रुप को इस परियोजना के लिए कोई नियम नहीं था। ऐसे में वर्षों से लटके प्रोजेक्ट में प्राधिकरण को किसी तरह के राजस्व की प्राप्ति नहीं हो रही थी। लिहाजा, अब प्राधिकरण ने इस परियोजना के अंतर्गत जितने भी आवंटी हैं उन पर समय विस्तार शुल्क लगाने का फैसला लिया है। यह समय विस्तार शुल्क नियम के मुताबिक 1 अप्रैल 2022 से लागू होगा।
जेपी के अलावा दूसरे बिल्डरों पर भी लगेगा शुल्क
जेपी इंफ्राटेक को मिले प्लॉट में से कुछ बेचे भी गए थे, जिसे दूसरे बिल्डरों ने खरीदा है और उस पर निर्माण कार्य किया हुआ है। अगर यह निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ है तो उन्हें भी समय विस्तार शुल्क देना पड़ेगा। अब यह नियम के मुताबिक निर्भर करता है कि किसे कितने समय के लिए निर्माण में छूट मिली है।
मिक्स लैंड यूज जमीन का हुआ था आवंटन
जेपी को जब जमीन का आवंटन हुआ था तो यह मिक्स लैंड यूज था यानी यहां आवासीय, ग्रुप हाउसिंग, वाणिज्यिक आदि के लिए निर्माण कार्य किए जा सकते थे। इसी कड़ी में दूसरे बिल्डरों ने भी यहां जेपी से जमीन खरीदी और निर्माण किया। हालांकि, जेपी ने जो ग्रुप हाउसिंग की परियोजना शुरू की, वह अब तक फंसी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें