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Noida News: बीमारी के लक्षण वालों की जांच में हर दूसरा शख्स मिला टीबी का मरीज

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बीमारी के लक्षण वालों की जांच में हर दूसरा शख्स मिला टीबी का मरीज
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या
टीबी: जिले में हर माह मिल रहे 875 मरीज
- शहरी क्षेत्र में बढ़ रहा बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा, जनपद में आठ माह में 7000 टीबी रोगियों की पुष्टि

नंबर गेम

- 12,000 से ज्यादा संदिग्ध मरीजों की हुई जांच

- 10,333 मरीजों को तलाशने का लक्ष्य इस साल

योगेश शर्मा

नोएडा। साल 2025 तक ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) मुक्त भारत बनाने के लिए मरीजों की पहचान का दायरा बढ़ाया गया है। इस बीच गौतमबुद्ध नगर में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जिले में आठ माह में 12 हजार संदिग्ध मरीजों की जांच की गई। इनमें सात हजार टीबी रोगियों की पुष्टि हुई है। यानी जांच में लगभग हर दूसरा शख्स टीबी का मरीज मिला है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो शहरी क्षेत्र में इस बीमारी का खतरा ज्यादा है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनपद में इस साल 10,333 टीबी मरीजों को तलाशने का लक्ष्य शासन से मिला है। हर महीने 1500 से अधिक मरीजों की जांच हो रही है। जिले में हर माह टीबी के औसतन 875 मरीज मिल रहे हैं। मरीजों की संख्या जिस रफ्तार से बढ़ रही है उससे इस साल पिछले सारे रिकॉर्ड टूटने की आशंका है। पिछले वर्ष में 9,790 टीबी रोगी जनपद में मिले थे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है जनपद में सबसे ज्यादा मरीज नोएडा में मिल रहे हैं, इसकी वजह इस क्षेत्र की घनी आबादी माना जा रहा है।
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संपर्क में आकर बन रहे रोगी

टीबी की बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आती है इलाज उतना ही आसान होता है। इलाज शुरू नहीं होने तक टीबी का मरीज कई लोगों को संक्रमित कर देता है, लेकिन एक माह के उपचार के बाद अन्य लोगों को टीबी फैलने का खतरा खत्म हो जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अध्ययन में सामने आया है कि टीबी रोगियों के संपर्क में आकर ज्यादातर मरीज इस बीमारी की चपेट में आए हैं। इनमें परिवार के सदस्यों की संख्या ज्यादा है।



हर तीसरे मरीज ने अधूरा छोड़ा इलाज

टीबी की बीमारी के खिलाफ चल रही मुहिम में मरीजों की लापरवाही बड़ी अड़चन बन रही है। जनपद में हर महीने औसतन 875 लोग इस बीमारी का शिकार बन रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट चिंताजनक हालात की ओर इशारा कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 में लगभग हर तीसरे मरीज ने इलाज बीच में छोड़ दिया। साल 2022 में 9790 टीबी रोगी पंजीकृत हुए थे, इनमें 2331 की निजी केंद्रों की जांच में पुष्टि हुई थी। विभाग को ऐसे 2734 रोगी मिले जिन्होंने निर्धारित समय से पहले ही इलाज छोड़ दिया। अधूरा इलाज छोड़कर मरीज अपनी परेशानी खुद बढ़ा रहे हैं।



बीमारी छुपाएं नहीं, जल्द इलाज कराएं

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि संक्रमण की शुरुआत में ही मरीज की पहचान होने से उसका उपचार आसान हो जाता है। इलाज शुरू नहीं होने तक टीबी का मरीज 15 से 20 लोगों को संक्रमित कर देता है, लेकिन एक माह के उपचार के बाद अन्य लोगों में इसका संक्रमण फैलने का खतरा खत्म हो जाता है। पूरा इलाज कराने और सही पोषण से टीबी रोगी पूरी तरह से ठीक हो जाता है। टीबी लाइलाज नहीं है, इसे छुपाना नहीं चाहिए।
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टीबी के लक्षण

तीन सप्ताह से अधिक खांसी, अत्यधिक पसीना आना, बलगम के साथ खून आना, शरीर में सुस्ती और थकावट, वजन में कमी, लंबे समय तक छाती में दर्द, हल्का बुखार, भूख नहीं लगना, मांसपेशियों में दर्द, सांस फूलना, सांस फूलना आदि।







साल दर साल टीबी के मरीज

साल
मरीज

2019
9,907

2020
7,024

2021
8,274

2022
9,790

2023 अब तक
7000
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