रक्षाबंधन के दिन शुक्रवार शाम सेक्टर-61 स्थित रॉयल टावर अपार्टमेंट में उस समय अफरातफरी मच गई, जब पांच लोग लिफ्ट में फंस गए। इनमें दो हार्ट पेशेंट और दो साल का मासूम बच्चा भी शामिल था। लिफ्ट पांचवीं और छठी मंजिल के बीच अचानक अटक गई। करीब 20 मिनट तक लोग लिफ्ट में फंसे रहे। सोसाइटी के एक निवासी की सीढ़ी की मदद से सभी को बाहर निकाला गया। घटना के बाद पुलिस को डायल-112 पर सूचना दी गई।
सोसाइटी निवासी सिद्धांत माथुर ने बताया कि रक्षाबंधन के लिए उनके घर रिश्तेदार आए हुए थे। शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे उनके चाचा विनय माथुर, पुष्प दयाल माथुर, दो साल का भाई का बेटा त्रियक्ष और दो अन्य लोग लिफ्ट से नीचे आ रहे थे। इसी दौरान लिफ्ट पांचवीं और छठी मंजिल के बीच अचानक रुक गई।
सिद्धांत ने बताया कि वह भी अपने परिवार के सदस्यों को छोड़ने के लिए आठवीं मंजिल से नीचे आ रहे थे, लेकिन दूसरी लिफ्ट में होने के कारण सुरक्षित नीचे पहुंच गए। जब उनके परिवार के सदस्य नीचे नहीं पहुंचे तो उन्होंने तलाश शुरू की। छठी मंजिल पर पहुंचने पर पता चला कि लिफ्ट बीच में फंसी हुई है और अंदर पांच लोग मौजूद हैं।
सिक्योरिटी गार्ड भी नहीं खोल सके लिफ्ट
लिफ्ट में लोगों के फंसने की जानकारी मिलने के बाद सिक्योरिटी गार्ड को बुलाया गया। काफी कोशिश के बाद भी गार्ड लिफ्ट का दरवाजा नहीं खोल सके। इसके बाद पांचवीं मंजिल पर रहने वाले एक निवासी ने अपनी सीढ़ी उपलब्ध कराई। सीढ़ी के सहारे लिफ्ट में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया। करीब 20 मिनट बाद सभी लोग सुरक्षित बाहर आ सके। इसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।
दो फंसे लोग हार्ट पेशेंट, 2 साल का मासूम डर गया
सिद्धांत के मुताबिक, लिफ्ट में फंसे पांच लोगों में दो लोग हार्ट पेशेंट हैं। ऐसे में लिफ्ट में लंबे समय तक फंसे रहने से परिजन काफी घबरा गए थे। उनका कहना है कि यदि लिफ्ट अधिक समय तक नहीं खुलती तो किसी की तबीयत बिगड़ सकती थी। रक्षाबंधन के दिन हुई इस घटना ने सोसाइटी की लिफ्ट व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दौरान 2 साल का बच्चा भी काफी डर गया था बाहर निकालने के समय वह कांप रहा था।
छह-सात महीने से खराब चल रही लिफ्ट
सिद्धांत ने आरोप लगाया कि सोसाइटी में पिछले छह-सात महीने से लिफ्ट को लेकर लगातार समस्या बनी हुई है। सोसाइटी में तीन टावर हैं और प्रत्येक टावर में दो लिफ्ट लगी हैं। उनका दावा है कि ज्यादातर समय कोई न कोई लिफ्ट खराब रहती है। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
लिफ्ट बदलने के लिए 25 हजार रुपये दिए
सिद्धांत ने बताया कि लिफ्ट बदलने के लिए आरडब्ल्यूए की ओर से अलग से रकम जुटाई जा रही है। उन्होंने करीब तीन महीने पहले 25 हजार रुपये का चेक भी दे दिया था। उनका कहना है कि कुछ फ्लैट मालिकों ने अभी रकम नहीं दी है, जिससे लिफ्ट बदलने का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। पैसा नहीं देने वाले लोगों के नाम टावर के नीचे नोटिस के रूप में चस्पा किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
पुलिस से भी की शिकायत
घटना के बाद सिद्धांत ने डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जानकारी ली। सोसाइटी निवासियों का कहना है कि लिफ्ट जैसी जरूरी सुविधा में बार-बार खराबी गंभीर सुरक्षा चिंता है। उनका कहना है कि खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए ऐसी स्थिति कभी भी बड़ा खतरा बन सकती है।