छोटे छोटे दांव पेच से गुंडों को सबक सिखा सकती हैं बेटियां
अपराजिता के तहत जीएल बजाज कॉलेज में 400 छात्राओं ने सीखे आत्मरक्षा के गुर
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। छोटे छोटे दांव पेच सीखकर बेटियां गुंडों को सबक सिखा सकती हैं। हमला करने वालों को रोक भी सकती हैं। नॉलेज पार्क स्थित जीएल बजाज कॉलेज में बुधवार को अपराजिता के तहत आत्मरक्षा की कार्यशाला में कराटे और ताइक्वांडो विशेषज्ञ विकी शर्मा ने छात्राओं से यह बातें कहीं। कॉलेज के आडिटोरियम में करीब 400 छात्राओं ने आत्मरक्षा के गुर सीखे। विकी ने बताया कि लड़के और लड़कियां दोनों ही शारीरिक रूप से मजबूत होती हैं। परवरिश में लड़कियों को अक्सर कमजोर बताने पर वह यही समझने लगती हैं। यही गलतफहमी दूर करने की जरूरत है। साथ ही मानसिक दृढ़ता के साथ किसी भी अन्याय या छेड़छाड़ का जवाब देने की जरूरत है। कराटे में ब्लैक बेल्ट विकी ने बताया कि किस तरह से लड़कियां गुंडों का प्रतिरोध कर उन्हें सबक सिखा सकती हैं। इसके लिए किसी खास हथियार या स्प्रे की भी जरूरत नहीं है। मोबाइल, पेन, पेंसिल, चिमटी या ऐसी किसी भी चीज का प्रयोग कर सकती हैं। इससे अराजकतत्व को न केवल रोका जा सकता है बल्कि प्रहार भी किया जा सकता है। विकी ने अपराजिता अभियान की जमकर तारीफ भी की। प्रोफेसर डॉ. मधु गौड़, डॉ. रुपाली, डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, डॉ. वंदना प्रिया, स्मृति सचान, डॉ. अमृता राय समेत अन्य शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।
आत्मरक्षा की कार्यशाला के तहत काफी कुछ सीखने को मिला। यह प्रशिक्षण हमें भविष्य में बहुत काम आएगा। इससे छात्राओं में आत्मविश्वास आएगा।
तान्या श्रीवास्तव
अपराजिता अभियान के तहत आत्मरक्षा की कार्यशाला बेहतरीन रही। इस तरह के अभियान और जागरूकता शिविर होते रहने चाहिए।
स्वाती प्रिया
कार्यशाला के माध्यम से कराटे और ताइक्वांडों के गुर सीखने को मिले। सभी छात्राओं को अपनी आत्मरक्षा के लिए इस तरह का प्रशिक्षण लेना चाहिए।
तनु