लुक्सर स्थित जेल में बंद 33 किसानों को बृहस्पतिवार को रिहा किया गया है। इनमें वह 29 किसान वह भी शामिल है, जो बुधवार को शांति भंग के आरोप में जेल भेजे गए थे। पुलिस आयुक्त के आदेश पर शांति भंग के आरोप में जेल गए किसानों से कोर्ट के आदेश पर व्यक्तिगत शपथपत्र लेकर जेल से रिहा किया है। वहीं चार किसानों के जरूरी दस्तावेज पूरे होने के बाद रिहा किया गया है। वर्तमान में तीन किसान जेल में बंद है। मंगलवार को कोर्ट 45 किसानों की रिहाई के लिए आदेश जारी किए थे।
मंगलवार शाम तक जेल में परवाना नहीं पहुंच पाया था। परवाना पहुंचने के बाद 38 किसानों बुधवार को जेल से बाहर आ पाए थे। सात किसानों को विभिन्न मामला होने के कारण रोक लिया गया था। जेल से बाहर आकर नारेबाजी व हंगामा करने वाले 29 किसानों को पुलिस ने दोबारा 14 दिन को लिए जेल भेज दिया था। हालांकि नौ किसान अपने घरों को चले गए थे। बृहस्पतिवार को शांति भंग करने के आरोप में जेल गए 29 किसानों को जेल से रिहा किया गया है।
चार किसानों की दस्तावेज पूरी रिहाई हुई है। किसानों को रिहा करने के दौरान हंगामा की आशंका के चलते पहले से ही जेल के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस जल परिसर के बाहर तैनात थी। किसानों के महापंचायत से पहले पुलिस भी सतर्क है। परी चौक, जीरो प्वाइंट, नोएडा ग्रेटर नोएडा, यमुना प्राधिकरण के बाहर निगरानी रही।
वहीं जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष उमेश भाटी देवटा का कहना है कि कुछ किसान नेता जेल में बंद है। उनके रिहाई के लिए अधिवक्ता साथी आगे भी किसानों के लिए खड़े रहेंगे। किसान की रिहाई के लिए हर संभव प्रयास अधिवक्ताओं की ओर से किया जाएगा। किसान नेता अतुल यादव का कहना है कि सुनील फौजी, रुपेश वर्मा आदि किसानों की रिहाई अबतक नहीं हुई है। जेल अधीक्षक बृजेश कुमार का कहना है कि कुल 33 किसानों को रिहा किया गया है। अब तीन किसान ही शेष है।