नोएडा के दादरी में बादलपुर कोतवाली के डेरी मच्छा गांव से करीब 20 साल पहले लापता हुए व्यक्ति की सूचना तो मिली लेकिन मौक होने के बाद। परिजनों को सोशल मीडिया से उनके अंतिम संस्कार करने वाले व्यक्ति ने बुजुर्ग की अस्थियां अपने पास होने की जानकारी दी। अब परिजन उनकी अस्थियों को लेने के लिए अयोध्या के लिए रवाना हो गए हैं। यह जानकारी मृतक के भतीजे संजीव कुमार ने दी।
डेरी मच्छा निवासी महावीर सिंह नागर करीब 20 साल पहले गायब हो गए थे। उनके तीन बेटी और एक बेटा है। घर से लापता होने के बाद परिजनों ने काफी तलाश किया था, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। करीब 8 साल पूर्व कानपुर में होने की सूचना परिजनों को मिली तो वहां जाकर भी तलाश किया था। मगर कोई कामयाबी नहीं मिली। उन्होंने बताया कि महावीर अयोध्या में सरयू नदी घाट पर रहते थे और वहीं पर चाय की दुकान चलाने लगे। वहां पर उनकी राम मिलन गुप्ता से मित्रता हो गई थी। इससे काफी अच्छे संबंध हो गए तो उन्होंने कहा कि उनकी मौत के बाद वह अपने बेटे व पोते से ही उनका अंतिम संस्कार कराएंगे।
लावारिस समझकर उनके शव को नदी में विसर्जित न कराएं। करीब 4 साल पहले राममिलन गुप्ता का भी निधन हो गया था। उनके परिवार के साथ महावीर सिंह नागर का काफी लगाव था। महावीर सिंह नागर अपने बारे में किसी को कुछ नहीं बताते थे। उधर, मुजफ्फनगर निवासी जयवीर सिंह यूपी पुलिस में हेड कांस्टेबल की डयूटी पांच साल पहले लक्ष्मण घाट पुलिस चौकी पर तैनाती हुई थी। वह अक्सर महावीर नागर की दुकान पर चाय पीने जाते थे।
जयवीर सिंह ने बोली पश्चिमी यूपी की सुनी तो उनके बारे में जानने का प्रयास किया। मगर उन्होंने कुछ न बताया। उसी दौरान हेड कांस्टेबल की राम मिलन गुप्ता के बेटे से जान पहचान हुई थी। अब जयवीर हापुड़ में तैनात है। बृहस्पतिवार को महावीर नागर के निधन हो जाने की अयोध्या निवासी कौशल पांडेय ने जानकारी जयवीर को दी।
जयवीर ने अपने दोस्तों के व्हाट्सएप ग्रुप पर महावीर सिंह नागर का फोटो व सूचना वायरल कर दी। यह सूचना एक के बाद एक ग्रुपों पर भी पहुंची और डेरी मच्छा में महावीर नागर के परिवार तक पहुंच गई। जानकारी मिलने पर परिजन दो गाड़ियों में सवार होकर उनकी अस्थियों को लेने के लिए अयोध्या के लिए रवाना हो गए हैं।