बिना प्रदूषण जांच के ही दौड़ रहे 1.27 लाख वाहन
- जिले में तीन माह में केवल 1921 वाहनों पर हुई चालान की कार्रवाई
हर्ष मिश्रा
नोएडा। जिले में बिना प्रदूषण जांच के ही 1.27 लाख वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ऐसे में संबंधित विभागों द्वारा कोई खास कार्रवाई भी नहीं की जी रही है। वहीं जिले में कुल पंजीकृत वाहन 8.87 लाख में से 75032 दो पहिया और 45119 चार पहिया वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्र की वैधता समाप्त हो चुकी है। हालांकि इस साल की पहली तिमाही में इस तरह के केवल 1921 वाहनों पर ही 10-10 हजार के चालान की कार्रवाई हुई है।
शहर में निजी वाहनों के मुकाबले कमर्शियल वाहनों का आवागमन अधिक होता है। वहीं परिवहन विभाग के आकड़ों के अनुसार 27 हजार से अधिक कमर्शियल वाहन ऐसे हैं जो बिना प्रदूषण जांच के दौड़ रहे हैं। इधर जनपद में करीब 100 से ज्यादा प्रदूषण जांच केंद्र हैं वहीं, पिछले तीन सालों में 54 पीयूसी केंद्र भी बढ़े हैं, लेकिन इसके बाद भी लोग वाहनों की प्रदूषण जांच नहीं करा रहे हैं। उप संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. सियाराम वर्मा बताते हैं कि प्रवर्तन टीमों द्वारा समय-समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। वहीं बड़े स्तर पर भी योजना तैयार की जाएगी।
एक वर्ष में बिना प्रदूषण के बढ़ गए 40 हजार वाहन
विभागों की सख्ती ना होने से लोगों की लापरवाही भी सामने आ रही है। बीते एक वर्ष में ही करीब 40 हजार वाहन बढ़ गए जिन्होंने अपने वाहन की फिटनेस जांच नहीं कराई है। मार्च 2022 में यह आंकड़ा 87 हजार था जबकि एक वर्ष में यह बढ़कर 1.27 लाख हो गया है। यह हालात तब है जब परिवहन विभाग के प्रवर्तन दल में छह टीमें काम कर रही हैं। वहीं 600 यातायात कर्मी तैनात हैं।
गर्मियों में बढ़ रहा एक्यूआई
आमतौर पर सर्दियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ता हुआ देखा जाता है, लेकिन अप्रैल की 30 से 35 डिग्री तक की गर्मी में एक्यूआई अब भी खराब श्रेणी में बना हुआ है। रविवार को नोएडा सेक्टर-125 का एक्यूआई दो दिन की बूंदाबांदी के बाद भी 228 रहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक प्रदूषण बढ़ाने में अवैध वाहनों का भी बहुत बड़ा योगदान है। वहीं जिले में ट्रांसपोर्ट का मुख्य सहारा माने जाने वाले करीब 19 हजार ऑटो में से चार हजार बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के ही दौड़ रहे हैं। इन पर भी कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति ही की जी रही है।