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Noida News: 12 हजार लीटर केमिकल ने ली बेगुनाहों की जान

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मालिक ने लोहे और प्लास्टिक के ड्रमों में केमिकल के अलावा फैक्ट्री परिसर में बना रखा था टैंक
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पेंट बनाने का मिला था मोटा ऑर्डर, समय पर काम करने के लिए कई लड़कों को हाल ही में रखा था





अमर उजाला ब्यूरो





नई दिल्ली। अलीपुर इलाके में अवैध पेंट फैक्ट्री में आग लगने से हुई 11 लोगों की मौत की पटकथा कई दिन पहले रखी गई थी। फैक्ट्री संचालक को पेंट बनाने के लिए भारी मात्रा में आर्डर मिला था। ऐसे में उसने कुछ दिन पहले पेंट बनाने के लिए करीब 12 हजार लीटर केमिकल मंगवाया था। इसे लोहे व प्लास्टिक के ड्रमों के अलावा फैक्ट्री परिसर में जमीन में बने कई टैंक में भी रखा गया था। ऐसे में आग लगने के दौरान भीषण तबाही हुई, जहां पर जमीन में टैंक बने थे वहां पर ज्यादा मौतें हुईं।









हादसे में जान गवांने वाले बृज किशोर के रिश्तेदार ने बताया कि केमिकल से भरे ड्रमों को रखने के लिए फैक्ट्री में लोहे के रैक बनाए जा रहे थे। इसके लिए फैक्ट्री के गेट के पास वेल्डिंग का काम चल रहा था। पास में केमिकल के ड्रम भी रखे थे। ऐसे में वेल्डिंग की चिंगारी से पास में रखे केमिकल के ड्रम में आग लगने की आशंका है।
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मुख्य गेट पर ताला लगाकर होता था काम

फैक्ट्री जहां पर संचालित हो रही थी वह संघन आबादी और संकरी गलियों वाला क्षेत्र है। फैक्ट्री तीन तरफ से बंद थी। चौड़ाई कम और लंबाई ज्यादा थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि फैक्ट्री करीब 30 वर्ष से चल रही थी, लेकिन हाल के दिनों में यहां से केमिकल की बदबू अधिक आ रही थी। फैक्ट्री के मुख्य गेट के साथ छोटे गेट से मजदूर आते-जाते थे। मुख्य गेट पर ताला लगाकर अंदर काम होता था।
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कर्मचारियों का खराब हो रहा था स्वास्थ्य

बेहद ज्वलनशील केमिकल से पेंट बनाने के दौरान फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों का स्वास्थ्य खराब हो रहा था। वहां काम के दौरान सुरक्षा आदि के बचाव का भी कोई साधन नहीं था। न तो मास्क था और न ही आग लगने के दौरान बचाव के कोई उपकरण। हादसे में मारे गए बृज किशोर की कई दिनों से आंखों में जलन हो रही थी। उन्होंने इसके लिए दवाई भी खरीदी थी। बृज के रिश्तेदार ने बताया कि आंखों में जलन को लेकर जब फैक्ट्री मालिक को बताया गया तो उसने ध्यान नहीं देने और मन लगाकर काम करने की बात कही थी।
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