अरिंदम चौधरी ने अदालत में किया समर्पण, जमानत मिली
फरीदाबाद। फिल्म निर्माता, लेखक एवं दिल्ली स्थित आईआईपीएम के निदेशक अरिंदम चौधरी ने एमबीए दाखिले में कथित धोखाधड़ी के मामले में शुक्रवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी तरुण सिंघल की अदालत में समर्पण कर दिया। अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के मुचलके और एक व्यक्ति की जमानत पर बेल दे दी। अदालत ने निदेशक के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया हुआ था। पल्ला निवासी तरुण ने 22 मई, 2013 को अपने वकील के माध्यम से अदालत में याचिका दायर कर बताया था कि वर्ष 2012 में शिक्षाडॉटकॉम के जरिये उसे दिल्ली स्थित आईआईपीएम संस्थान के बारे में पता चला था। फिर उसने आईआईपीएम संस्थान के प्रबंधन के पास एमबीए दाखिले के लिए 1,80,825 रुपये जमा करवा दिए थे। दाखिले का शुल्क जमा होने के बाद उसे पता चला कि संस्थान की एमबीए की डिग्री यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) से मान्यता प्राप्त नहीं है। उसने संस्थान से अपने दाखिला का शुल्क वापस मांगा, लेकिन संस्थान ने शुल्क देने से मना कर दिया। इस मामले में पीड़ित ने आईआईपीएम के निदेशक अरिंदम चौधरी, मैनेजर निधि तोमर, हरदीप सिंह, प्रशासक ईवान, रोहित फौगाट और अशोक के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। 18 अगस्त वर्ष 2017 को अदालत ने उक्त आरोपियों के खिलाफ समन जारी कर दिया था, मगर इनमें से कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ था। शुक्रवार को अरिंदम चौधरी ने इस मामले में अदालत में समर्पण किया। बाकी आरोपियों के पेश नहीं होने पर अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।