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Noida News: विश्व स्वास्थ्य दिवस आज

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विश्व स्वास्थ्य दिवस आज
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सरकारी अस्पताल खुद बीमार...लोग कैसे कराएं उपचार

- चिकित्सकों, दवाओं और सुविधाओं का टोटा

- खराब दिनचर्या बना रही मरीज़, सेहतमंद रहने के लिए करना होगा बदलाव

माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। पहला सुख निरोगी काया। यह कहावत 100 प्रतिशत सही है, लेकिन आजकल खराब दिनचर्या लोगों को बीमार बना रही है। इस पर तुर्रा ये है कि सरकारी अस्पतालों में अच्छा इलाज भी मयस्सर नहीं। वजह, न पर्याप्त डॉक्टर हैं और न दवाएं। निजी अस्पतालों में इलाज इतना महंगा हो गया है जो आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है। ऐसे में खुद ही खानपान और रहन सहन में बदलाव कर सेहतमंद रहना जरूरी है और मजबूरी भी, इसलिए लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, जिला व महिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी में हर साल करीब 15 लाख लोग इलाज कराने के लिए जाते हैं। यहां 243 निजी अस्पताल हैं, जिनमें भी कमोबेश इतने ही मरीज़ पहुंचते हैं। जिले की करीब 40 लाख आबादी में मरीज़ों की इस संख्या से साफ जाहिर है कि हर घर में कोई न कोई बीमार है। वहीं, इलाज की स्थिति बदतर है। मेडिकल कॉलेज में 839 तरह की दवाएं रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से वहां इन दिनों 450 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। पीएल शर्मा जिला अस्पताल में 240 तरह की दवाएं पंजिकृत हैं, जिनमें से 225 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। महिला अस्पताल में 250 तरह में से 200 तरह की दवाइयां हैं। सीएमओ के अंतर्गत आने वाली सीएचसी, पीएचसी और अर्बन हेल्थ सेंटर में भी 175 तरह की दवाइयां मंगाई जाती हैं। जिनमें से 150 तरह की ही उपलब्ध रहती हैं। इसके अलावा डॉक्टरों का भी टोटा है।
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103 चिकित्सक मानकों से कम हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के अंतर्गत 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 32 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 26 अर्बन हेल्थ सेंटर हैं। यहां 20 चिकित्सक मानकों से कम हैं। सीएचसी-पीएचसी और अर्बन हेल्थ सेंटर आदि पर 182 चिकित्सक होने चाहिए, लेकिन 162 हैं।
महिला जिला अस्पताल में 24 महिला चिकित्सक होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 10 हैं। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 54 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 29 चिकित्सक ही कार्यरत हैं, जबकि
मेडिकल कॉलेज में 44 चिकित्सकों व शिक्षकों की कमी है।
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सेहतमंद रहने के लिए सबसे ज़रूरी है बेहतर खानपान
फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए सबसे पहले खानपान पर ध्यान देने की जरूरत है। अच्छे खानपान के कारण ही हम स्वस्थ रहते हैं और खानपान में असंतुलन की वजह से बीमार भी पड़ते हैं। पौष्टिक गुणों से भरपूर आहार जैसे हरी सब्जियां, अनाज, ड्राई फ्रूट्स, फल आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

जल्दी सोएं, जल्दी जागें
फिजिशियन डॉ वीके बिंद्रा ने बताया कि अगर समय पर सोएंगे और समय पर उठेंगे तो न सिर्फ स्वस्थ रहेंगे बल्कि दिमाग की कार्य क्षमता पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। नियमित रूप से जल्दी सोएं और सुबह जल्दी उठने की कोशिश करें। यह स्वस्थ बनाए रखने का अचूक मंत्र साबित हो सकता है।

पैदल चलें, बनी रहेगी सेहत
फिजिशियन डॉ विश्वजीत बैंबी ने बताया कि मोटापा आने का मुख्य कारण तैलीय व मीठे पदार्थ होते हैं। इससे चर्बी बढ़ती है, शरीर में आलस्य एवं सुस्ती आती है। सेहतमन्द रहना है तो इन पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में ही करें। गरिष्ठ-भारी भोजन या हजम न होने वाले भोजन का त्याग करें। जहां तक हो कम दूरी के लिए पैदल जाएं। इससे मांसपेशियों का व्यायाम होगा, जिससे लोग निरोगी बने रहेंगे, साथ ही पर्यावरण की रक्षा में भी सहायक होंगे।
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सकारात्मक सोच भी ज़रूरी
मनोचिकित्सक डॉ रवि राणा बताते हैं कि खुद को सकारात्मक बनाए रखने की हर समय कोशिश ज़रूर करें। खुश रहें। तनाव से दूर रहें, इससे निजात पाने और स्वस्थ शरीर के लिए व्यायाम करें। जब भी दिन की शुरुआत करें, अपने बारे में एक अच्छी बात सोचें। इससे आपका पूरा दिन अच्छा और सकारात्मक गुजरेगा।
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