अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तरी रेलवे की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के नोटिस को चुनौती दी थी। डीपीसीसी की जांच में पाया कि उत्तरी रेलवे बिना सहमति के कार्य कर रहा था। इस कारण इसे रेड कैटेगरी यानी प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की सूची में शामिल किया गया है। डीपीसीसी ने उत्तरी रेलवे पर 18 दिसंबर 2023 से 15 मई 2025 तक 515 दिनों के लिए 40 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कुल 2.06 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। एनजीटी ने रेलवे को 15 दिनों का अंतिम मौका दिया है, जिसमें उसे संचालित करने की सहमति के लिए आवेदन करना होगा और सभी आवश्यक टेस्ट रिपोर्ट जमा करनी होंगी। अदालत ने डीपीसीसी को निर्देश दिया कि वह छह हफ्तों के भीतर दोबारा निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। इस मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर 2025 को होगी।