नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रेमचंद अभिलेखागार और साहित्यिक केंद्र ने भारत सरकार के राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद् के सहयोग से प्रेमचंद का अदब विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की। इसमें मुंशी प्रेमचंद के साहित्य के क्षेत्र में योगदान पर चर्चा हुई। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के तौर पर जेएनयू के सेंटर फॉर इंडियन लैग्वेजेज के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अनवर आशा ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में समान रूप से पढ़े जाने वाले लेखक हैं। उनका साहित्य मानवीय संवेदनाओं का श्रेष्ठ उदाहरण है। कार्यक्रम में परिषद के निदेशक डॉ. शम्स इकबाल ने कहा कि आज उनके साहित्य को नए दृष्टिकोण से पढ़ने की जरूरत है। ब्यूरो