राजधानी को स्वच्छ, स्वस्थ और रहने योग्य बनाने के उद्देश्य से पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने ओखला लैंडफिल स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने लैंडफिल साइट पर चल रही बायो-रिमेडिएशन और बायो-माइनिंग गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने वादा किया कि वर्ष 2028 तक कूड़े के पहाड़ गायब हो जाएंगे। उनके साथ महापौर राजा इकबाल सिंह, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी भी उपस्थित थे।
निरीक्षण के दौरान सिरसा ने कहा कि 62 एकड़ क्षेत्र में फैले ओखला लैंडफिल की ऊंचाई 60 मीटर से घटकर अब 20 मीटर रह गई है। अब तक 30 एकड़ से अधिक भूमि को कचरे से मुक्त होकर समतल हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि दिसंबर 2025 तक 30 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे को हटाया जाए और वर्ष 2028 तक दिल्ली से सभी कूड़े के पहाड़ समाप्त कर दिए जाएं।
अब तक 56 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे की साइंटिफिक बायो-माइनिंग और प्रोसेसिंग हो चुकी है। चरण 2 के अंतर्गत 6.55 लाख मीट्रिक टन कचरे की प्रोसेसिंग तो सिर्फ कुछ महीनों में ही की गई है। चरण 2 के तहत 20 लाख मीट्रिक टन कचरे की प्रोसेसिंग जारी है जिसे आवश्यकतानुसार 30 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकता है। इस लक्ष्य की समय-सीमा दिसंबर 2025 है जिसके लिए कार्य तेजी से प्रगति पर है, जबकि सरकार अक्तूबर 2025 तक ही इस लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास कर रही है।
सिरसा ने आगे कहा कि अगर भारत सीमा पार जाकर आतंकियों के ठिकाने नष्ट कर सकता है, तो हम अपनी राजधानी से कूड़े के पहाड़ भी हटा सकते हैं। जैसे पृथ्वी से डायनासोर लुप्त हो गए, वैसे ही ये कूड़े के पहाड़ भी दिल्ली से गायब हो जाएंगे। दिल्ली में पर्यावरण सुधार के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक बदलाव है। इससे लैंडफिल के आसपास रहने वाले लाखों लोगों को एक नया जीवन मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में दिल्ली वासियों को स्वच्छ हवा और स्वच्छ जल मुहैया कराने के अलावा कचरे के पहाड़ों का पूर्ण सफाया शामिल है। इन कचरे के पहाड़ों के हटने से लैंडफिल साइट्स के आसपास रहने वाले लाखों लोगों को नया जीवन मिलेगा।
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