बवाना चौक पर बसों के हार्न और धूल धुएं के बीच अमर उजाला ने बवाना सीट का राजनीतिक तापमान नापा। एक तरफ किसान आंदोलन के समर्थक भाजपा और आम आदमी पार्टी दोनों दलों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए दिखाई दिए। वहीं आप सरकार द्वारा फ्री बस सेवा का असर महिला मतदाताओं पर साफ दिखाई दे रहा था।
गांव के रहने वाले सतीश नंबरदार ने बताया कि इलाके में सफाई और कूड़े की समस्या बड़ी है। इसके अलावा जाम व पानी की समस्या से भी लोगों की दिक्कतें बढ़ जाती है। इस सीट पर महिला सुरक्षा और अपराध भी एक बड़ा मुद्दा है। वहीं युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के विकल्प की नामौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
बवाना विधानसभा सीट का भूगोल
उत्तरी पश्चिमी लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाला बवाना क्षेत्र ग्रामीण एरिया है। यहां बवाना सहित 21 गांव हैं, जिसमें दरियापुर, औचंदी, हरेवली, मुंगेशपुर, कुतुबगढ़, कटेवडा, वाजितपुर, नांगल ठाकरान, चांदपुर खुर्द चांदपुर कलां, वेगमपुर, सुल्तानपुर डवास, पूठ खुर्द, वरवाला,माजरा, प्रहलादपुर, शाहावाद और जट खोर पंजाब खोर जैसे छोटे गांव शामिल हैं। दो बड़े जेजे क्लस्टर है। यहां छोटे बड़े कई बॉर्डर इलाके हैं, जिसकी सीमा हरियाणा से जुड़ती है। बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया भी है।
यह हैं मुद्दे
ग्रामीणों के मुताबिक गांव के अंदर तालाबों के सौदर्यीकरण, गंदे पानी की निकासी, पार्क, हायर एजुकेशन की व्यवस्था नही है। बवाना में गर्ल्स कॉलेज है पर समय-समय पर उसके भी शिफ्टिंग की बात उठती है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर मेट्रो की स्वीकृति हो चुकी है। बवाना में जाम एक अहम मुद्दा है। दिल्लीभर से निकलने वाले कूड़े के निपटारे के लिए यहां बड़े पैमाने राजनीतिक मिजाज पर एनर्जी प्लांट बनाया जा रहा, जिससे लोग परेशान है। लोगों के मुताबिक, गांव से लगे एक्सटेंशन लाल डोरे में भी मूलभूत सुविधाएं नही है।
बवाना सीट का इतिहास
बवाना विधानसभा सीट दिल्ली जो अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है। आम आदमी पार्टी इस सीट से लगातार तीन बार से जीत हासिल कर रही है। दिल्ली के उत्तरी दिल्ली जिले के तहत आने वाली बवाना विधानसभा सीट पर 1993 से विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इस सीट पर कुल 7 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। 1993 के पहले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के चांद राम ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 1998 के चुनाव में कांग्रेस के सुरिंदर कुमार ने बाजी मारी और यहां पर लगातार तीन बार जीत का सिलसिला जारी रखा। 2013 में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा में जबरदस्त प्रदर्शन किया, हालांकि बवाना सीट पर बीजेपी का कब्जा रहा। फिर 2015 और 2020 तथा 2017 के उपचुनाव में आप ने सीट पर कब्जा जमाया।
हमारे टैक्स से लोगों को फ्री में बांटने के खिलाफ लोगों को अपनी बात रखनी चाहिए। लोगों को फ्री में अनाज और नगदी देकर सरकारें समाज का संतुलन बिगाड़ने का प्रयास कर रही है। सरकारों को नगदी की जगह रोजगार के लिए निवेश करना चाहिए।
-जेपी भारद्वाज
सरकार ढांचागत निर्माण पर अधिक जोर दे। बवाना सीट के लोग दिल्ली के अन्य इलाकों से कटे हुए हैं। सरकार को बवाना के यातायात की सुविधा के लिए काम करना चाहिए।
- रणधीर सिंह सहरावत
कूड़ा और सड़कों का जाम बड़ी समस्या है। सड़कों पर बस और ट्रक इत्यादि अक्सर फंस जाते हैं और कई घंटे तक जाम लगा रहता है। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से भी यह जगह संवेदनशील है।
-जयपाल सिंह सहरावत