मानसून की दस्तक से पहले लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने राजधानी को डूबने से बचाने के लिए सख्त और विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। पिछले वर्षों (2023, 2024 और 2025) के अनुभवों और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के इनपुट के आधार पर विभाग ने दिल्ली में 448 ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान की है जहां भारी बारिश के दौरान पानी भरने की सबसे अधिक संभावना रहती है।
मानसून से पहले एमसीडी अलर्ट, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
मानसून से पहले दिल्ली की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एमसीडी अलर्ट है। इस कड़ी में महापौर प्रवेश वाही ने निगम मुख्यालय में स्वच्छता और मानसून की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए।
महापौर ने कहा कि मानसून से पहले नालों की सफाई, कचरा प्रबंधन और जलभराव रोकने की तैयारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। महापौर ने दिल्ली की सीमाओं और प्रवेश मार्गों की विशेष सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि राजधानी में आने वाले लोगों के सामने दिल्ली की स्वच्छ और बेहतर छवि दिखनी चाहिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, फ्लड विभाग, दिल्ली जल बोर्ड और अन्य एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करने पर जोर दिया।
इस दौरान जवाबदेही तय करने पर भी विशेष जोर दिया गया। महापौर ने निर्देश दिए कि हर वार्ड में स्वच्छता अधिकारियों और नोडल अधिकारियों के संपर्क नंबर सार्वजनिक रूप से नोटिस बोर्ड पर लगाए जाएं। नेता सदन जय भगवान यादव ने कचरा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए कॉम्पैक्टर लगाने के कार्य में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कोई कमी नहीं है और यदि कहीं लापरवाही मिली तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उपमहापौर डॉक्टर मोनिका पंत ने अधिकारियों से जमीनी स्तर पर सक्रिय रहकर सफाई व्यवस्था मजबूत करने को कहा। वहीं निगम आयुक्त संजीव खिरवार ने अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए।
सरकार का दावा, 76% बड़े नाले हुए साफ, मानसून से पहले एक्शन मोड में मशीनरी
मानसून से पहले जलभराव की समस्या से निपटने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सरकार के मुताबिक राजधानी के बड़े ड्रेनों की डी-सिल्टिंग का करीब 76 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। राजधानी में कुल 29 लाख मीट्रिक टन सिल्ट हटाने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसमें अब तक 22 लाख मीट्रिक टन से अधिक सिल्ट निकाली जा चुकी है।
दिल्ली सरकार ने बताया कि इस बार मनसून के दौरान लोगों को जलभराव से राहत दिलाने के लिए समयबद्ध तरीके से नालों की सफाई कराई जा रही है। डी-सिल्टिंग के काम में आधुनिक मशीनों और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे काम की गति और गुणवत्ता दोनों बेहतर हुई हैं। विभिन्न विभागों की ओर से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बारिश के दौरान जिन इलाकों में हर साल जलभराव की समस्या सामने आती है, वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नालों की सफाई के साथ जल निकासी व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि बारिश का पानी तेजी से निकल सके।
तैयारियां पहले के मुकाबले व्यवस्थित
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस बार मानसून से पहले की तैयारियों को पहले के मुकाबले ज्यादा व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाया गया है। लक्ष्य है कि बारिश के मौसम में लोगों को सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम जैसी परेशानियों का कम से कम सामना करना पड़े।