इधर, नेता विपक्ष राजा इकबाल सिंह ने कहा कि वे सहयोगी पार्षदों के साथ स्टैंडिंग कमेटी गठित करने की लगातार मांग करते रहे। दिन में ही निगम आयुक्त और निगम सचिव से मिलकर ज्ञापन दिया कि स्टैंडिंग कमेटी से संबंधित सदन में लाया जा रहा प्रस्ताव असांविधानिक है। इसे एजेंडे से हटाया जाए, इसके बावजूद सत्ता पक्ष इस प्रस्ताव को पास कराने पर उतारू था, इसलिए निर्णय लिया गया कि सदन में असांविधानिक एजेंडे को पास करने के लिए मेयर को कुर्सी पर नहीं बैठने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि निगम हर हाल में डीएमसी एक्ट के मुताबिक ही चलेगा। नेता विपक्ष और पूर्व मेयर राजा इकबाल सिंह ने कहा कि जब सदन शुरू ही नहीं हुआ तो कोई प्रस्ताव कैसे पास हो जाएंगे। सदन के अंदर न आयुक्त आए, न निगम सचिव थे और न कोई अधिकारी मौजूद थे। आम आदमी पार्टी और भाजपा के पार्षद एक-दूसरे पर छींटाकशी कर रहे थे, हाथापाई कर रहे थे। अचानक मेयर आईं और हाथ हिलाकर चली गईं। न वह अपनी कुर्सी पर बैठीं और न सदन की कार्यवाही शुरू कराई। आखिर कैसे कोई एजेंडा पास हो सकता है।
तुरंत सदन से लौट गईं मेयर
मेयर डॉ. शैली ओबरॉय दोपहर करीब 2.27 बजे सदन में पहुंचीं, लेकिन विपक्ष ने इन्हें डायस पर चढ़ने ही नहीं दिया। वे निगम आयुक्त व अन्य अधिकारियों के साथ तुरंत सदन से वापस लौट गईं। दोबारा करीब 3.15 बजे फिर से लौटीं, लेकिन फिर से डायस को विपक्ष ने घेर रखा था। वह फिर लौट गईं। इस बार निगम आयुक्त और निगम सचिव सदन में नहीं लौटे थे।
निगम सचिव के दफ्तर के बाहर दिया धरना
इसके बाद भाजपा पार्षदों ने निगम सचिव के दफ्तर के बाहर बैठकर धरना देना शुरू कर दिया। करीब दो घंटे से ज्यादा देर तक भाजपा के पार्षद धरने पर बैठे रहे। इस दौरान निगम सचिव दफ्तर से बाहर नहीं निकल पाए। बाद में अधिकारियों की विपक्ष से बात हुई और सदन में लौटने पर सहमति बनी। निगम सचिव विपक्ष के साथ सदन में पहुंचे। सदन में नेता एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
गायब थी मेयर की कुर्सी
मेयर शाम को करीब 6.32 बजे सदन में पहुंचीं और इस बार उन्होंने हर हाल में अपनी कुर्सी तक पहुंचने का निर्णय लिया। पक्ष-विपक्ष के पार्षदों के बीच खींचतान के बीच वह अपनी जगह तक पहुंचीं, लेकिन यहां इनकी कुर्सी गायब थी। मेयर ने दोनों हाथ उठाकर कहा, आज लाए गए दोनों प्रस्ताव पास किए जाते हैं।
भाजपा के पार्षद कभी भी निगम के हित में बात नहीं करते : मेयर
सदन से लौटने के बाद मेयर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि भाजपा के पार्षद कभी भी नगर निगम के हित में बात नहीं करते और न दिल्ली की जनता के बारे में सोचते हैं। सदन की विशेष बैठक मुख्य रूप से दो एजेंडे को लेकर बुलाई गई थी। सुप्रीम कोर्ट की ज्यूडिशियल कमेटी ने छह साल पहले सील हुई दुकानों को डी-सील करने के आदेश दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने इसका पालन नहीं किया, इसलिए फिर से प्रस्ताव लाना पड़ा। दूसरा स्टैंडिंग कमेटी के गठन को लेकर प्रस्ताव था। स्टैंडिंग कमेटी नहीं होने से बहुत सारे बड़े प्रोजेक्ट शुरू करने में बाधा आ रही है। मेयर ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ कि उनकी कुर्सी खींच ली गई और बैठने नहीं दिया गया। जब दूसरी बार फिर से स्टेज पर जाने की कोशिश की, तो भाजपा के पार्षदों ने फिर से माइक खींच लिया, कुर्सी खींच ली और सारे पेपर इधर-उधर कर दिए। इसके बावजूद तीसरे प्रयास में उन्होंने जनता के हित में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए।